Couplets Poetry (page 606)

जेब ख़ाली है 'अदम' मय क़र्ज़ पर मिलती नहीं

अब्दुल हमीद अदम

जब तिरे नैन मुस्कुराते हैं

अब्दुल हमीद अदम

इजाज़त हो तो मैं तस्दीक़ कर लूँ तेरी ज़ुल्फ़ों से

अब्दुल हमीद अदम

हुस्न इक दिलरुबा हुकूमत है

अब्दुल हमीद अदम

हम को शाहों की अदालत से तवक़्क़ो' तो नहीं

अब्दुल हमीद अदम

हम और लोग हैं हम से बहुत ग़ुरूर न कर

अब्दुल हमीद अदम

हुजूम-ए-हश्र में खोलूँगा अद्ल का दफ़्तर

अब्दुल हमीद अदम

हाथ से खो न बैठना उस को

अब्दुल हमीद अदम

हर दिल-फ़रेब चीज़ नज़र का ग़ुबार है

अब्दुल हमीद अदम

हद से बढ़ कर हसीन लगते हो

अब्दुल हमीद अदम

गुलों को खिल के मुरझाना पड़ा है

अब्दुल हमीद अदम

गिरते हैं लोग गर्मी-ए-बाज़ार देख कर

अब्दुल हमीद अदम

इक हसीं आँख के इशारे पर

अब्दुल हमीद अदम

दिल ख़ुश हुआ है मस्जिद-ए-वीराँ को देख कर

अब्दुल हमीद अदम

दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं

अब्दुल हमीद अदम

देखा है किस निगाह से तू ने सितम-ज़रीफ़

अब्दुल हमीद अदम

दरोग़ के इम्तिहाँ-कदे में सदा यही कारोबार होगा

अब्दुल हमीद अदम

छोड़ा नहीं ख़ुदी को दौड़े ख़ुदा के पीछे

अब्दुल हमीद अदम

बोले कोई हँस कर तो छिड़क देते हैं जाँ भी

अब्दुल हमीद अदम

बाज़ औक़ात किसी और के मिलने से 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

बारिश शराब-ए-अर्श है ये सोच कर 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

बढ़ के तूफ़ान को आग़ोश में ले ले अपनी

अब्दुल हमीद अदम

और तो दिल को नहीं है कोई तकलीफ़ 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़

अब्दुल हमीद अदम

ऐ दोस्त मोहब्बत के सदमे तन्हा ही उठाने पड़ते हैं

अब्दुल हमीद अदम

'अदम' रोज़-ए-अजल जब क़िस्मतें तक़्सीम होती थीं

अब्दुल हमीद अदम

आप इक ज़हमत-ए-नज़र तो करें

अब्दुल हमीद अदम

आँखों से पिलाते रहो साग़र में न डालो

अब्दुल हमीद अदम

आँख का ए'तिबार क्या करते

अब्दुल हमीद अदम

ज़वाल-ए-जिस्म को देखो तो कुछ एहसास हो इस का

अब्दुल हमीद