Couplets Poetry (page 608)

शोलों से बे-कार डराते हो हम को

अब्दुल अहद साज़

शिकस्त-ए-व'अदा की महफ़िल अजीब थी तेरी

अब्दुल अहद साज़

शेर अच्छे भी कहो सच भी कहो कम भी कहो

अब्दुल अहद साज़

शायरी तलब अपनी शायरी अता उस की

अब्दुल अहद साज़

'साज़' जब खुला हम पर शेर कोई 'ग़ालिब' का

अब्दुल अहद साज़

रात है लोग घर में बैठे हैं

अब्दुल अहद साज़

प्यास बुझ जाए ज़मीं सब्ज़ हो मंज़र धुल जाए

अब्दुल अहद साज़

पस-मंज़र में 'फ़ीड' हुए जाते हैं इंसानी किरदार

अब्दुल अहद साज़

नींद मिट्टी की महक सब्ज़े की ठंडक

अब्दुल अहद साज़

नेक गुज़रे मिरी शब सिद्क़-ए-बदन से तेरे

अब्दुल अहद साज़

नज़र की मौत इक ताज़ा अलमिया

अब्दुल अहद साज़

मुशाबहत के ये धोके मुमासलत के फ़रेब

अब्दुल अहद साज़

मुफ़्लिसी भूक को शहवत से मिला देती है

अब्दुल अहद साज़

मिरी रफ़ीक़-ए-नफ़्स मौत तेरी उम्र दराज़

अब्दुल अहद साज़

मिरे मह ओ साल की कहानी की दूसरी क़िस्त इस तरह है

अब्दुल अहद साज़

मैं एक साअत-ए-बे-ख़ुद में छू गया था जिसे

अब्दुल अहद साज़

मैं बढ़ते बढ़ते किसी रोज़ तुझ को छू लेता

अब्दुल अहद साज़

ला से ला का सफ़र था तो फिर किस लिए

अब्दुल अहद साज़

ख़िरद की रह जो चला मैं तो दिल ने मुझ से कहा

अब्दुल अहद साज़

ख़बर के मोड़ पे संग-ए-निशाँ थी बे-ख़बरी

अब्दुल अहद साज़

जीतने मारका-ए-दिल वो लगातार गया

अब्दुल अहद साज़

जिन को ख़ुद जा के छोड़ आए क़ब्रों में हम

अब्दुल अहद साज़

जैसे कोई दायरा तकमील पर है

अब्दुल अहद साज़

घर वाले मुझे घर पर देख के ख़ुश हैं और वो क्या जानें

अब्दुल अहद साज़

दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना

अब्दुल अहद साज़

दाद-ओ-तहसीन की बोली नहीं तफ़्हीम का नक़्द

अब्दुल अहद साज़

बुरा हो आईने तिरा मैं कौन हूँ न खुल सका

अब्दुल अहद साज़

बोल थे दिवानों के जिन से होश वालों ने

अब्दुल अहद साज़

बयाज़ पर सँभल सके न तजरबे

अब्दुल अहद साज़

बचपन में हम ही थे या था और कोई

अब्दुल अहद साज़