Couplets Poetry (page 605)

फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत

अब्दुल हमीद अदम

पहले बड़ी रग़बत थी तिरे नाम से मुझ को

अब्दुल हमीद अदम

नौजवानी में पारसा होना

अब्दुल हमीद अदम

मुझे तौबा का पूरा अज्र मिलता है उसी साअत

अब्दुल हमीद अदम

मुद्दआ दूर तक गया लेकिन

अब्दुल हमीद अदम

मशहूर इक सवाल किया था करीम ने

अब्दुल हमीद अदम

मरने वाले तो ख़ैर हैं बेबस

अब्दुल हमीद अदम

मैं यूँ तलाश-ए-यार में दीवाना हो गया

अब्दुल हमीद अदम

मैं उम्र भर जवाब नहीं दे सका 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

मैं मय-कदे की राह से हो कर निकल गया

अब्दुल हमीद अदम

मैं बद-नसीब हूँ मुझ को न दे ख़ुशी इतनी

अब्दुल हमीद अदम

मैं और उस ग़ुंचा-दहन की आरज़ू

अब्दुल हमीद अदम

मय-कदा है यहाँ सकूँ से बैठ

अब्दुल हमीद अदम

लोग कहते हैं कि तुम से ही मोहब्बत है मुझे

अब्दुल हमीद अदम

लज़्ज़त-ए-ग़म तो बख़्श दी उस ने

अब्दुल हमीद अदम

कुछ कुछ मिरी आँखों का तसर्रुफ़ भी है शामिल

अब्दुल हमीद अदम

किसी जानिब से कोई मह-जबीं आने ही वाला है

अब्दुल हमीद अदम

किसी हसीं से लिपटना अशद ज़रूरी है

अब्दुल हमीद अदम

ख़ुदा ने गढ़ तो दिया आलम-ए-वजूद मगर

अब्दुल हमीद अदम

कौन अंगड़ाई ले रहा है 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ

अब्दुल हमीद अदम

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं

अब्दुल हमीद अदम

कभी तो दैर-ओ-हरम से तू आएगा वापस

अब्दुल हमीद अदम

जुनूँ अब मंज़िलें तय कर रहा है

अब्दुल हमीद अदम

जो अक्सर बार-वर होने से पहले टूट जाते थे

अब्दुल हमीद अदम

जिस से छुपना चाहता हूँ मैं 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

जिन को दौलत हक़ीर लगती है

अब्दुल हमीद अदम

जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़

अब्दुल हमीद अदम

जी चाहता है आज 'अदम' उन को छेड़िए

अब्दुल हमीद अदम

झाड़ कर गर्द-ए-ग़म-ए-हस्ती को उड़ जाऊँगा मैं

अब्दुल हमीद अदम