Sad Poetry (page 133)

कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे

फ़ैज़ अनवर

मामूली बे-कार समझने वाले मुझ से दूर रहें

फ़ैज़ आलम बाबर

लाख बहकाए ये दुनिया हो गया तो हो गया

फ़ैज़ आलम बाबर

ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये दाग़ दाग़ उजाला ये शब-गज़ीदा सहर

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तेज़ है आज दर्द-ए-दिल साक़ी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सजाओ बज़्म ग़ज़ल गाओ जाम ताज़ा करो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिन्नत-ए-चारा-साज़ कौन करे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिरी जान आज का ग़म न कर कि न जाने कातिब-ए-वक़्त ने

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जानता है कि वो न आएँगे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम अहल-ए-क़फ़स तन्हा भी नहीं हर रोज़ नसीम-ए-सुब्ह-ए-वतन

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ग़म-ए-जहाँ हो रुख़-ए-यार हो कि दस्त-ए-अदू

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चमन पे ग़ारत-ए-गुल-चीं से जाने क्या गुज़री

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बे-दम हुए बीमार दवा क्यूँ नहीं देते

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ऐ ज़ुल्म के मातो लब खोलो चुप रहने वालो चुप कब तक

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक सुब्ह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक शाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़