Couplets Poetry (page 135)

आइने में कहीं गुम हो गई सूरत मेरी

सरफ़राज़ ख़ालिद

तिलिस्म तोड़ दिया इक शरीर बच्चे ने

सरफ़राज़ दानिश

शहर भर के आईनों पर ख़ाक डाली जाएगी

सरफ़राज़ दानिश

रात की सरहद यक़ीनन आ गई

सरफ़राज़ दानिश

हम अपने जलते हुए घर को कैसे रो लेते

सरफ़राज़ दानिश

हमारा शेर भी लौह-ए-तिलिस्म है शायद

सरफ़राज़ दानिश

ग़म का सूरज तो डूबता ही नहीं

सरफ़राज़ दानिश

चंद लम्हे को तू ख़्वाबों में भी आ कर झाँक ले

सरफ़राज़ दानिश

ज़िंदा रहने का हक़ मिलेगा उसे

सरफ़राज़ अबद

सुरूर-ए-जाँ-फ़ज़ा देती है आग़ोश-ए-वतन सब को

सरफ़राज़ शाहिद

स्पैशलिस्ट पेन-किलर दे तो कौन सा?

सरफ़राज़ शाहिद

'शाहिद'-साहिब कहलाते हैं मिस्टर भी मौलाना भी

सरफ़राज़ शाहिद

सारे शिकवे दूर हो जाएँ जो क़ुदरत सौंप दे

सरफ़राज़ शाहिद

राज़-ओ-नियाज़ में भी अकड़-फ़ूँ नहीं गई

सरफ़राज़ शाहिद

मुर्ग़ पर फ़ौरन झपट दावत में वर्ना ब'अद में

सरफ़राज़ शाहिद

लबों में आ के क़ुल्फ़ी हो गए अशआर सर्दी में

सरफ़राज़ शाहिद

कुछ मह-जबीं लिबास के फैशन की दौड़ में

सरफ़राज़ शाहिद

कोई ख़ुश-ज़ौक़ ही 'शाहिद' ये नुक्ता जान सकता है

सरफ़राज़ शाहिद

इस दौर के मर्दों की जो की शक्ल-शुमारी

सरफ़राज़ शाहिद

ईद पर मसरूर हैं दोनों मियाँ बीवी बहुत

सरफ़राज़ शाहिद

हम ने तो उन्हें जामिआ से नक़्द ख़रीदा

सरफ़राज़ शाहिद

फ़क़त रंग ही उन का काला नहीं है

सरफ़राज़ शाहिद

बजट की कई सख़्तियाँ और भी हैं

सरफ़राज़ शाहिद

अवामुन्नास को ऐसे दबोचा है गिरानी ने

सरफ़राज़ शाहिद

ऐसे लगे है नौकरी माल-ए-हराम के बग़ैर

सरफ़राज़ शाहिद

वक़्त के सहरा में नंगे पाँव ठहरे हो 'सलीम'

सरदार सलीम

नूर की शाख़ से टूटा हुआ पत्ता हूँ मैं

सरदार सलीम

कुछ ऐसा हो कि तस्वीरों में जल जाए तसव्वुर भी

सरदार सलीम

'ग़ालिब'-ए-दाना से पूछो इश्क़ में पड़ कर सलीम

सरदार सलीम

फ़िक्र ओ एहसास के तपते हुए मंज़र तक आ

सरदार सलीम