Couplets Poetry (page 195)
मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ'नी
क़तील शिफ़ाई
मुफ़्लिस के बदन को भी है चादर की ज़रूरत
क़तील शिफ़ाई
मेरे ब'अद वफ़ा का धोका और किसी से मत करना
क़तील शिफ़ाई
माना जीवन में औरत इक बार मोहब्बत करती है
क़तील शिफ़ाई
मैं जब 'क़तील' अपना सब कुछ लुटा चुका हूँ
क़तील शिफ़ाई
मैं घर से तेरी तमन्ना पहन के जब निकलूँ
क़तील शिफ़ाई
मैं अपने दिल से निकालूँ ख़याल किस किस का
क़तील शिफ़ाई
ले मेरे तजरबों से सबक़ ऐ मिरे रक़ीब
क़तील शिफ़ाई
क्यूँ शरीक-ए-ग़म बनाते हो किसी को ऐ 'क़तील'
क़तील शिफ़ाई
क्या मस्लहत-शनास था वो आदमी 'क़तील'
क़तील शिफ़ाई
क्या जाने किस अदा से लिया तू ने मेरा नाम
क़तील शिफ़ाई
कुछ कह रही हैं आप के सीने की धड़कनें
क़तील शिफ़ाई
किस तरह अपनी मोहब्बत की मैं तकमील करूँ
क़तील शिफ़ाई
जो भी आता है बताता है नया कोई इलाज
क़तील शिफ़ाई
जीत ले जाए कोई मुझ को नसीबों वाला
क़तील शिफ़ाई
जिस बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है
क़तील शिफ़ाई
जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ
क़तील शिफ़ाई
हुस्न को चाँद जवानी को कँवल कहते हैं
क़तील शिफ़ाई
हम उसे याद बहुत आएँगे
क़तील शिफ़ाई
हम को आपस में मोहब्बत नहीं करने देते
क़तील शिफ़ाई
हौसला किस में है यूसुफ़ की ख़रीदारी का
क़तील शिफ़ाई
हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे
क़तील शिफ़ाई
हालात से ख़ौफ़ खा रहा हूँ
क़तील शिफ़ाई
गुनगुनाती हुई आती हैं फ़लक से बूँदें
क़तील शिफ़ाई
गिरते हैं समुंदर में बड़े शौक़ से दरिया
क़तील शिफ़ाई
गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं
क़तील शिफ़ाई
दुश्मनी मुझ से किए जा मगर अपना बन कर
क़तील शिफ़ाई
दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
क़तील शिफ़ाई
दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं
क़तील शिफ़ाई
दाद-ए-सफ़र मिली है किसे राह-ए-शौक़ में
क़तील शिफ़ाई