Couplets Poetry (page 197)
यूँ न मिलने के सौ बहाने हैं
क़मर मुरादाबादी
क़दम उठे भी नहीं बज़्म-ए-नाज़ की जानिब
क़मर मुरादाबादी
मुद्दतों बाद जो इस राह से गुज़रा हूँ 'क़मर'
क़मर मुरादाबादी
मंज़िलों के निशाँ नहीं मिलते
क़मर मुरादाबादी
लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-जिगर याद आई
क़मर मुरादाबादी
किसी की राह में काँटे किसी की राह में फूल
क़मर मुरादाबादी
जिस क़दर जज़्ब-ए-मोहब्बत का असर होता गया
क़मर मुरादाबादी
हर्फ़ आने न दिया इश्क़ की ख़ुद्दारी पर
क़मर मुरादाबादी
ग़म की तौहीन न कर ग़म की शिकायत कर के
क़मर मुरादाबादी
दैर ओ काबा से जो हो कर गुज़रे
क़मर मुरादाबादी
अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब
क़मर मुरादाबादी
या इलाहाबाद में रहिए जहाँ संगम भी हो
क़मर जमील
हम सितारों की तरह डूब गए
क़मर जमील
एक पत्थर कि दस्त-ए-यार में है
क़मर जमील
अपनी नाकामियों पे आख़िर-ए-कार
क़मर जमील
ज़रा रूठ जाने पे इतनी ख़ुशामद
क़मर जलालवी
ज़ब्त करता हूँ तो घुटता है क़फ़स में मिरा दम
क़मर जलालवी
यही है गर ख़ुशी तो रात भर गिनते रहो तारे
क़मर जलालवी
वो चार चाँद फ़लक को लगा चला हूँ 'क़मर'
क़मर जलालवी
तेरे क़ुर्बान 'क़मर' मुँह सर-ए-गुलज़ार न खोल
क़मर जलालवी
सुरमे का तिल बना के रुख़-ए-ला-जवाब में
क़मर जलालवी
सुना है ग़ैर की महफ़िल में तुम न जाओगे
क़मर जलालवी
शुक्रिया ऐ क़ब्र तक पहुँचाने वालो शुक्रिया
क़मर जलालवी
शब को मिरा जनाज़ा जाएगा यूँ निकल कर
क़मर जलालवी
रुस्वा करेगी देख के दुनिया मुझे 'क़मर'
क़मर जलालवी
रोएँगे देख कर सब बिस्तर की हर शिकन को
क़मर जलालवी
रौशन है मेरा नाम बड़ा नामवर हूँ मैं
क़मर जलालवी
'क़मर' ज़रा भी नहीं तुम को ख़ौफ़-ए-रुस्वाई
क़मर जलालवी
'क़मर' किसी से भी दिल का इलाज हो न सका
क़मर जलालवी
'क़मर' अपने दाग़-ए-दिल की वो कहानी मैं ने छेड़ी
क़मर जलालवी