Couplets Poetry (page 199)
वो फूल जो मिरे दामन से हो गए मंसूब
क़ैसर-उल जाफ़री
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
क़ैसर-उल जाफ़री
तुम्हारे बस में अगर हो तो भूल जाओ मुझे
क़ैसर-उल जाफ़री
तुम से बिछड़े दिल को उजड़े बरसों बीत गए
क़ैसर-उल जाफ़री
तुम आ गए हो ख़ुदा का सुबूत है ये भी
क़ैसर-उल जाफ़री
तू इस तरह से मिरे साथ बेवफ़ाई कर
क़ैसर-उल जाफ़री
सावन एक महीने 'क़ैसर' आँसू जीवन भर
क़ैसर-उल जाफ़री
रास्ता देख के चल वर्ना ये दिन ऐसे हैं
क़ैसर-उल जाफ़री
रास्ता देख के चल वर्ना ये दिन ऐसे हैं
क़ैसर-उल जाफ़री
रक्खी न ज़िंदगी ने मिरी मुफ़लिसी की शर्म
क़ैसर-उल जाफ़री
मुसाफ़िर चलते चलते थक गए मंज़िल नहीं मिलती
क़ैसर-उल जाफ़री
मैं ज़हर पीता रहा ज़िंदगी के हाथों से
क़ैसर-उल जाफ़री
कितने दिनों के प्यासे होंगे यारो सोचो तो
क़ैसर-उल जाफ़री
कम से कम रेत से आँखें तो बचेंगी 'क़ैसर'
क़ैसर-उल जाफ़री
जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो
क़ैसर-उल जाफ़री
जिस दिन से बने हो तुम मसीहा
क़ैसर-उल जाफ़री
हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
क़ैसर-उल जाफ़री
हर शख़्स है इश्तिहार अपना
क़ैसर-उल जाफ़री
घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
क़ैसर-उल जाफ़री
फ़न वो जुगनू है जो उड़ता है हवा में 'क़ैसर'
क़ैसर-उल जाफ़री
दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है
क़ैसर-उल जाफ़री
दस्तक में कोई दर्द की ख़ुश्बू ज़रूर थी
क़ैसर-उल जाफ़री
बस्ती में है वो सन्नाटा जंगल मात लगे
क़ैसर-उल जाफ़री
आज बरसों में तो क़िस्मत से मुलाक़ात हुई
क़ैसर-उल जाफ़री
उस के आँगन में रौशनी थी मगर
क़ैशर शमीम
साज़ से मेरे ग़लत नग़्मों की उम्मीद न कर
क़ैशर शमीम
सब्ज़ मौसम से मुझे क्या लेना
क़ैशर शमीम
मेरा मज़हब इश्क़ का मज़हब जिस में कोई तफ़रीक़ नहीं
क़ैशर शमीम
मौसम अजीब रहता है दल के दयार का
क़ैशर शमीम
किसी मंज़िल में भी हासिल न हुआ दिल को क़रार
क़ैशर शमीम