Couplets Poetry (page 200)
तू सरापा नूर है मैं तेरा अक्स-ए-ख़ास हूँ
क़ैसर निज़ामी
तिरे बग़ैर तेरे इंतिज़ार से थक कर
क़ैसर निज़ामी
तमाम उम्र रहे मेरा मुंतज़िर तू भी
क़ैसर निज़ामी
ख़िज़ाँ की ज़द में ही अब तक तिरा गुलिस्ताँ था
क़ैसर निज़ामी
अब तो रुस्वाइयाँ यक़ीनी हैं
क़ैसर निज़ामी
अफ़्सुर्दा-दिल के वास्ते क्या चाँदनी का लुत्फ़
क़द्र बिलगरामी
ज़माना दोस्त है किस किस को याद रक्खोगे
क़ाबिल अजमेरी
ये सब रंगीनियाँ ख़ून-ए-तमन्ना से इबारत हैं
क़ाबिल अजमेरी
ये गर्दिश-ए-ज़माना हमें क्या मिटाएगी
क़ाबिल अजमेरी
वक़्त करता है परवरिश बरसों
क़ाबिल अजमेरी
उन की पलकों पर सितारे अपने होंटों पे हँसी
क़ाबिल अजमेरी
तुम को भी शायद हमारी जुस्तुजू करनी पड़े
क़ाबिल अजमेरी
तुम्हारी गलियों में फिर रहा हूँ
क़ाबिल अजमेरी
तुम न मानो मगर हक़ीक़त है
क़ाबिल अजमेरी
तज़ाद-ए-जज़्बात में ये नाज़ुक मक़ाम आया तो क्या करोगे
क़ाबिल अजमेरी
रास्ता है कि कटता जाता है
क़ाबिल अजमेरी
रंग-ए-महफ़िल चाहता है इक मुकम्मल इंक़लाब
क़ाबिल अजमेरी
मुझे तो इस दर्जा वक़्त-ए-रुख़्सत सुकूँ की तल्क़ीन कर रहे हो
क़ाबिल अजमेरी
मैं अपने ग़म-ख़ाना-ए-जुनूँ में
क़ाबिल अजमेरी
कुछ देर किसी ज़ुल्फ़ के साए में ठहर जाएँ
क़ाबिल अजमेरी
कुछ और बढ़ गई है अंधेरों की ज़िंदगी
क़ाबिल अजमेरी
कूचा-ए-यार मरकज़-ए-अनवार
क़ाबिल अजमेरी
कोई दीवाना चाहे भी तो लग़्ज़िश कर नहीं सकता
क़ाबिल अजमेरी
कितने शोरीदा-सर मोहब्बत में
क़ाबिल अजमेरी
ख़ुद तुम्हें चाक-ए-गरेबाँ का शुऊर आ जाएगा
क़ाबिल अजमेरी
कौन याद आ गया अज़ाँ के वक़्त
क़ाबिल अजमेरी
हम ने उस के लब ओ रुख़्सार को छू कर देखा
क़ाबिल अजमेरी
हम बदलते हैं रुख़ हवाओं का
क़ाबिल अजमेरी
हैरतों के सिलसिले सोज़-ए-निहाँ तक आ गए
क़ाबिल अजमेरी
ग़म-ए-जहाँ के तक़ाज़े शदीद हैं वर्ना
क़ाबिल अजमेरी