Couplets Poetry (page 193)
होना था ज़िंदगी ही में मुँह शैख़ का सियाह
क़ाएम चाँदपुरी
हाथों से दिल ओ दीदा के आया हूँ निपट तंग
क़ाएम चाँदपुरी
हर उज़्व है दिल-फ़रेब तेरा
क़ाएम चाँदपुरी
हर तरफ़ ज़र्फ़-ए-वज़ू भरते हैं ज़ाहिद हुई सुब्ह
क़ाएम चाँदपुरी
हर दम आने से मैं भी हूँ नादिम
क़ाएम चाँदपुरी
गिर्या तो 'क़ाएम' थमा मिज़्गाँ अभी होंगे न ख़ुश्क
क़ाएम चाँदपुरी
गर्म कर दे तू टुक आग़ोश में आ
क़ाएम चाँदपुरी
गर यही ना-साज़ी-ए-दीं है तो इक दिन शैख़-जी
क़ाएम चाँदपुरी
गंदुमी रंग जो है दुनिया में
क़ाएम चाँदपुरी
फ़िक्र-ए-तामीर में हूँ फिर भी मैं घर की ऐ चर्ख़
क़ाएम चाँदपुरी
दुनिया में हम रहे तो कई दिन प इस तरह
क़ाएम चाँदपुरी
दूँ हम-सरी में बैठ के किस ना-सज़ा के साथ
क़ाएम चाँदपुरी
दुख़्तर-ए-रज़ तो है बेटी सी तिरे ऊपर हराम
क़ाएम चाँदपुरी
दिल से बस हाथ उठा तू अब ऐ इश्क़
क़ाएम चाँदपुरी
दिल को फाँसा है हर इक उज़्व की तेरे छब ने
क़ाएम चाँदपुरी
दर्द-ए-दिल क्यूँ-कि कहूँ मैं उस से
क़ाएम चाँदपुरी
दर्द-ए-दिल कुछ कहा नहीं जाता
क़ाएम चाँदपुरी
डहा खड़ा है हज़ारों जगह से क़स्र-ए-वजूद
क़ाएम चाँदपुरी
चाहिए आदमी हो बार-ए-तअल्लुक़ से बरी
क़ाएम चाँदपुरी
चाहें हैं ये हम भी कि रहे पाक मोहब्बत
क़ाएम चाँदपुरी
बिना थी ऐश-ए-जहाँ की तमाम ग़फ़लत पर
क़ाएम चाँदपुरी
बाँग-ए-मस्जिद से कब उस को सर-ए-मानूसी है
क़ाएम चाँदपुरी
बड़ न कह बात को तीं हज़रत-ए-'क़ाएम' की कि वो
क़ाएम चाँदपुरी
बा'द ख़त आने के उस से था वफ़ा का एहतिमाल
क़ाएम चाँदपुरी
ऐ इश्क़ मिरे दोश पे तू बोझ रख अपना
क़ाएम चाँदपुरी
अहल-ए-मस्जिद ने जो काफ़िर मुझे समझा तो क्या
क़ाएम चाँदपुरी
आगे मिरे न ग़ैर से गो तुम ने बात की
क़ाएम चाँदपुरी
आ ऐ 'असर' मुलाज़िम-ए-सरकार-ए-गिर्या हो
क़ाएम चाँदपुरी
यही तो होता है शीशे के कारोबार का हश्र
क़ौस सिद्दीक़ी
ज़िंदगी मैं भी चलूँगा तिरे पीछे पीछे
क़तील शिफ़ाई