Couplets Poetry (page 191)
ज़ालिम तू मेरी सादा-दिली पर तो रहम कर
क़ाएम चाँदपुरी
ये पास-ए-दीं तिरा है सब उस वक़्त तक कि शैख़
क़ाएम चाँदपुरी
याँ तलक ख़ुश हूँ अमारिद से कि ऐ रब्ब-ए-करीम
क़ाएम चाँदपुरी
वहशत-ए-दिल कोई शहरों में समा सकती है
क़ाएम चाँदपुरी
टूटा जो काबा कौन सी ये जा-ए-ग़म है शैख़
क़ाएम चाँदपुरी
टुकड़े कई इक दिल के मैं आपस में सिए हैं
क़ाएम चाँदपुरी
टुक फ़हम इरादत से बरहमन की समझ शैख़
क़ाएम चाँदपुरी
थोड़ी सी बात में 'क़ाएम' की तू होता है ख़फ़ा
क़ाएम चाँदपुरी
तर्क कर अपना भी कि इस राह में
क़ाएम चाँदपुरी
तरफ़ ने बंद किया है हर इक तरफ़ से तुझे
क़ाएम चाँदपुरी
सुब्ह तक था वहीं ये मुख़्लिस भी
क़ाएम चाँदपुरी
शिकवा न बख़्त से है ने आसमाँ से मुझ को
क़ाएम चाँदपुरी
शामत है क्या कि शैख़ से कोई मिले कि वाँ
क़ाएम चाँदपुरी
शैख़-जी माना मैं इस को तुम फ़रिश्ता हो तो हो
क़ाएम चाँदपुरी
शैख़-जी क्यूँकि मआसी से बचें हम कि गुनाह
क़ाएम चाँदपुरी
शैख़-जी आया न मस्जिद में वो काफ़िर वर्ना हम
क़ाएम चाँदपुरी
संग को आब करें पल में हमारी बातें
क़ाएम चाँदपुरी
सैर उस कूचे की करता हूँ कि जिब्रील जहाँ
क़ाएम चाँदपुरी
रौनक़-ए-बादा-परस्ती थी हमीं तक जब से
क़ाएम चाँदपुरी
रस्म इस घर की नहीं दाद किसू की दे कोई
क़ाएम चाँदपुरी
क़िस्सा-ए-बरहना-पाई को मिरे ऐ मजनूँ
क़ाएम चाँदपुरी
क़िस्मत तो देख टूटी है जा कर कहाँ कमंद
क़ाएम चाँदपुरी
क़ाज़ी ख़बर ले मय को भी लिक्खा है वाँ मुबाह
क़ाएम चाँदपुरी
'क़ाएम' मैं रेख़्ता को दिया ख़िलअत-ए-क़ुबूल
क़ाएम चाँदपुरी
'क़ाएम' मैं इख़्तियार किया शाएरी का ऐब
क़ाएम चाँदपुरी
क़ाएम मैं ग़ज़ल तौर किया रेख़्ता वर्ना
क़ाएम चाँदपुरी
'क़ाएम' जो कहें हैं फ़ारसी यार
क़ाएम चाँदपुरी
'क़ाएम' हयात-ओ-मर्ग-ए-बुज़-ओ-गाव में हैं नफ़अ
क़ाएम चाँदपुरी
पूछो हो मुझ से तुम कि पिएगा भी तू शराब
क़ाएम चाँदपुरी
पास-ए-इख़्लास सख़्त है तकलीफ़
क़ाएम चाँदपुरी