Couplets Poetry (page 192)
परवाने की शब की शाम हूँ मैं
क़ाएम चाँदपुरी
पहले ही गधा मिले जहाँ शैख़
क़ाएम चाँदपुरी
पहले ही अपनी कौन थी वाँ क़द्र-ओ-मंज़िलत
क़ाएम चाँदपुरी
नज़र में काबा क्या ठहरे कि याँ दैर
क़ाएम चाँदपुरी
न जाने कौन सी साअत चमन से बिछड़े थे
क़ाएम चाँदपुरी
मुझ बे-गुनह के क़त्ल का आहंग कब तलक
क़ाएम चाँदपुरी
मिरी नज़र में है 'क़ाएम' ये काएनात तमाम
क़ाएम चाँदपुरी
मस्जिद से गर तू शैख़ निकाला हमें तो क्या
क़ाएम चाँदपुरी
मअनी न आएँ दर्क में ग़ैर-अज़-वजूद-ए-लफ़्ज़
क़ाएम चाँदपुरी
मैं किन आँखों से ये देखूँ कि साया साथ हो तेरे
क़ाएम चाँदपुरी
मैं कहा अहद क्या किया था रात
क़ाएम चाँदपुरी
मैं हूँ कि मेरे दुख पे कोई चश्म-ए-तर न हो
क़ाएम चाँदपुरी
मैं दिवाना हूँ सदा का मुझे मत क़ैद करो
क़ाएम चाँदपुरी
मय पी जो चाहे आतिश-ए-दोज़ख़ से तू नजात
क़ाएम चाँदपुरी
मय की तौबा को तो मुद्दत हुई 'क़ाएम' लेकिन
क़ाएम चाँदपुरी
लगाई आग पानी में ये किस के अक्स ने प्यारे
क़ाएम चाँदपुरी
कूचा तिरा नशे की ये शिद्दत जहाँ से लाग
क़ाएम चाँदपुरी
कोई दिन आगे भी ज़ाहिद अजब ज़माना था
क़ाएम चाँदपुरी
किस बात पर तिरी मैं करूँ ए'तिबार हाए
क़ाएम चाँदपुरी
की वफ़ा किस से भला फ़ाहिशा-ए-दुनिया ने
क़ाएम चाँदपुरी
ख़स नमत साथ मौज के लग ले
क़ाएम चाँदपुरी
कर न जुरअत तू ऐ तबीब कि ये
क़ाएम चाँदपुरी
कहता है आइना कि है तुझ सा ही एक और
क़ाएम चाँदपुरी
कब मैं कहता हूँ कि तेरा मैं गुनहगार न था
क़ाएम चाँदपुरी
जूँ शीशा भरा हूँ मय से लेकिन
क़ाएम चाँदपुरी
जिस मुसल्ले पे छिड़किए न शराब
क़ाएम चाँदपुरी
जिस चश्म को वो मेरा ख़ुश-चश्म नज़र आया
क़ाएम चाँदपुरी
ईराद कर न पढ़ के मिरा ख़त कि ये तमाम
क़ाएम चाँदपुरी
इलाही वाक़ई इतना ही बद है फ़िस्क़-ओ-फ़ुजूर
क़ाएम चाँदपुरी
हम दिवानों को बस है पोशिश से
क़ाएम चाँदपुरी