Couplets Poetry (page 194)

यूँ तसल्ली दे रहे हैं हम दिल-ए-बीमार को

क़तील शिफ़ाई

यूँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना

क़तील शिफ़ाई

यूँ बरसती हैं तसव्वुर में पुरानी यादें

क़तील शिफ़ाई

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में

क़तील शिफ़ाई

ये मो'जिज़ा भी मोहब्बत कभी दिखाए मुझे

क़तील शिफ़ाई

ये घर मिरा गुलशन है गुलशन का ख़ुदा-हाफ़िज़

क़तील शिफ़ाई

यारो ये दौर ज़ोफ़-ए-बसारत का दौर है

क़तील शिफ़ाई

वो तेरी भी तो पहली मोहब्बत न थी 'क़तील'

क़तील शिफ़ाई

वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम

क़तील शिफ़ाई

वो दिल ही क्या तिरे मिलने की जो दुआ न करे

क़तील शिफ़ाई

उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन

क़तील शिफ़ाई

तुम्हारी बे-रुख़ी ने लाज रख ली बादा-ख़ाने की

क़तील शिफ़ाई

तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं

क़तील शिफ़ाई

तुम आ सको तो शब को बढ़ा दो कुछ और भी

क़तील शिफ़ाई

थोड़ी सी और ज़ख़्म को गहराई मिल गई

क़तील शिफ़ाई

थक गया मैं करते करते याद तुझ को

क़तील शिफ़ाई

तर्क-ए-वफ़ा के ब'अद ये उस की अदा 'क़तील'

क़तील शिफ़ाई

सूख गई जब आँखों में प्यार की नीली झील 'क़तील'

क़तील शिफ़ाई

सुबूत-ए-इश्क़ की ये भी तो एक सूरत है

क़तील शिफ़ाई

सोच को जुरअत-ए-पर्वाज़ तो मिल लेने दो

क़तील शिफ़ाई

सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना

क़तील शिफ़ाई

शम्अ जिस आग में जलती है नुमाइश के लिए

क़तील शिफ़ाई

रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में

क़तील शिफ़ाई

रहेगा साथ तिरा प्यार ज़िंदगी बन कर

क़तील शिफ़ाई

राब्ता लाख सही क़ाफ़िला-सालार के साथ

क़तील शिफ़ाई

'क़तील' अब दिल की धड़कन बन गई है चाप क़दमों की

क़तील शिफ़ाई

निकल कर दैर-ओ-काबा से अगर मिलता न मय-ख़ाना

क़तील शिफ़ाई

निकल कर दैर-ओ-काबा से अगर मिलता न बुत-ख़ाना

क़तील शिफ़ाई

न जाने कौन सी मंज़िल पे आ पहुँचा है प्यार अपना

क़तील शिफ़ाई

न छाँव करने को है वो आँचल न चैन लेने को हैं वो बाँहें

क़तील शिफ़ाई