Couplets Poetry (page 359)
तलब दुनिया को कर के ज़न-मुरीदी हो नहीं सकती
हैदर अली आतिश
तब्ल-ओ-अलम ही पास हैं अपने न मुल्क-ओ-माल
हैदर अली आतिश
तब्ल-ओ-अलम ही पास है अपने न मुल्क ओ माल
हैदर अली आतिश
सुन तो सही जहाँ में है तेरा अफ़्साना क्या
हैदर अली आतिश
सिवाए रंज कुछ हासिल नहीं है इस ख़राबे में
हैदर अली आतिश
शीरीं के शेफ़्ता हुए परवेज़ ओ कोहकन
हैदर अली आतिश
शहर में क़ाफ़िया-पैमाई बहुत की 'आतिश'
हैदर अली आतिश
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था
हैदर अली आतिश
सख़्ती-ए-राह खींचिए मंज़िल के शौक़ में
हैदर अली आतिश
सफ़र है शर्त मुसाफ़िर-नवाज़ बहुतेरे
हैदर अली आतिश
रख के मुँह सो गए हम आतिशीं रुख़्सारों पर
हैदर अली आतिश
क़ामत तिरी दलील क़यामत की हो गई
हैदर अली आतिश
क़ैद-ए-मज़हब की गिरफ़्तारी से छुट जाता है
हैदर अली आतिश
पयाम-बर न मयस्सर हुआ तो ख़ूब हुआ
हैदर अली आतिश
पयाम्बर न मयस्सर हुआ तो ख़ूब हुआ
हैदर अली आतिश
पा-ब-गिल बे-ख़ुदी-ए-शौक़ से मैं रहता था
हैदर अली आतिश
न पूछ हाल मिरा चोब-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ
हैदर अली आतिश
न पाक होगा कभी हुस्न ओ इश्क़ का झगड़ा
हैदर अली आतिश
न जब तक कोई हम-प्याला हो मैं मय नहीं पीता
हैदर अली आतिश
न गोर-ए-सिकंदर न है क़ब्र-ए-दारा
हैदर अली आतिश
मिरी तरह से मह-ओ-महर भी हैं आवारा
हैदर अली आतिश
मेहंदी लगाने का जो ख़याल आया आप को
हैदर अली आतिश
मस्त हाथी है तिरी चश्म-ए-सियह-मस्त ऐ यार
हैदर अली आतिश
मसनद-ए-शाही की हसरत हम फ़क़ीरों को नहीं
हैदर अली आतिश
मर्द-ए-दरवेश हूँ तकिया है तवक्कुल मेरा
हैदर अली आतिश
मैं वो ग़म-दोस्त हूँ जब कोई ताज़ा ग़म हुआ पैदा
हैदर अली आतिश
मैं उस गुलशन का बुलबुल हूँ बहार आने नहीं पाती
हैदर अली आतिश
मय-कदे में नश्शा की ऐनक दिखाती है मुझे
हैदर अली आतिश
लिबास-ए-काबा का हासिल किया शरफ़ उस ने
हैदर अली आतिश
लगे मुँह भी चिढ़ाने देते देते गालियाँ साहब
हैदर अली आतिश