Couplets Poetry (page 358)

हँस हँस के अपना दामन-ए-रंगीं दिया मुझे

हैरत गोंडवी

गुलों से नहीं शाख़ के दिल से पूछो

हैरत गोंडवी

ग़रीबी अमीरी है क़िस्मत का सौदा

हैरत गोंडवी

न तो कुछ फ़िक्र में हासिल है न तदबीर में है

हैरत इलाहाबादी

कहा आशिक़ से वाक़िफ़ हो तो फ़रमाया नहीं वाक़िफ़

हैरत इलाहाबादी

अपना ही हाल तक न खुला मुझ को ता-ब-मर्ग

हैरत इलाहाबादी

आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं

हैरत इलाहाबादी

वस्ल की शब थी और उजाले कर रक्खे थे

हैदर क़ुरैशी

पानी में भी चाँद सितारे उग आते हैं

हैदर क़ुरैशी

मौत से पहले जहाँ में चंद साँसों का अज़ाब

हैदर क़ुरैशी

दिल को तो बहुत पहले से धड़का सा लगा था

हैदर क़ुरैशी

दरख़्तों पर परिंदे लौट आना चाहते हैं

हैदर क़ुरैशी

चाँद बन कर चमकने वाले ने

हैदर क़ुरैशी

सभी तो दोस्त हैं क्यूँ शक अबस हुआ मुझ को

हैदर अली जाफ़री

क्या ज़रूरी है जू-ए-शीर की बात

हैदर अली जाफ़री

किस की सदा फ़ज़ाओं में गूँजी है चार-सू

हैदर अली जाफ़री

ख़ून मज़दूर का मिलता जो न तामीरों में

हैदर अली जाफ़री

खींच देता मैं ज़माने पे मोहब्बत के नुक़ूश

हैदर अली जाफ़री

भुला न पाया उसे जिस को भूल जाना था

हैदर अली जाफ़री

आए ठहरे और रवाना हो गए

हैदर अली जाफ़री

ज़ियारत होगी काबे की यही ताबीर है इस की

हैदर अली आतिश

ये दिल लगाने में मैं ने मज़ा उठाया है

हैदर अली आतिश

ये आरज़ू थी तुझे गुल के रू-ब-रू करते

हैदर अली आतिश

यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया

हैदर अली आतिश

वहशत-ए-दिल ने किया है वो बयाबाँ पैदा

हैदर अली आतिश

वही पस्ती ओ बुलंदी है ज़मीं की आतिश

हैदर अली आतिश

उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें

हैदर अली आतिश

उस बला-ए-जाँ से 'आतिश' देखिए क्यूँकर बने

हैदर अली आतिश

ठीक आई तन पे अपने क़बा-ए-बरहनगी

हैदर अली आतिश

तिरे अबरू-ए-पेवस्ता का आलम में फ़साना है

हैदर अली आतिश