Couplets Poetry (page 360)
कुफ़्र ओ इस्लाम की कुछ क़ैद नहीं ऐ 'आतिश'
हैदर अली आतिश
कू-ए-जानाँ में भी अब इस का पता मिलता नहीं
हैदर अली आतिश
कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा
हैदर अली आतिश
कूचा-ए-यार में हो रौशनी अपने दम की
हैदर अली आतिश
कोई तो दोश से बार-ए-सफ़र उतारेगा
हैदर अली आतिश
कोई बुत-ख़ाने को जाता है कोई काबे को
हैदर अली आतिश
किसी ने मोल न पूछा दिल-ए-शिकस्ता का
हैदर अली आतिश
किसी की महरम-ए-आब-ए-रवाँ की याद आई
हैदर अली आतिश
ख़ुदा दराज़ करे उम्र चर्ख़-ए-नीली की
हैदर अली आतिश
कौन से दिन हाथ में आया मिरे दामान-ए-यार
हैदर अली आतिश
काट कर पर मुतमइन सय्याद बे-परवा न हो
हैदर अली आतिश
करता है क्या ये मोहतसिब-ए-संग-दिल ग़ज़ब
हैदर अली आतिश
काबा ओ दैर में है किस के लिए दिल जाता
हैदर अली आतिश
जो देखते तिरी ज़ंजीर-ए-ज़ुल्फ़ का आलम
हैदर अली आतिश
जो आला-ज़र्फ़ होते हैं हमेशा झुक के मिलते हैं
हैदर अली आतिश
इलाही एक दिल किस किस को दूँ मैं
हैदर अली आतिश
ईद-ए-नौ-रोज़ दिल अपना भी कभी ख़ुश करते
हैदर अली आतिश
हर शब शब-ए-बरात है हर रोज़ रोज़-ए-ईद
हैदर अली आतिश
हमेशा मैं ने गरेबाँ को चाक चाक किया
हैदर अली आतिश
हमारा काबा-ए-मक़्सूद तेरा ताक़-ए-अबरू है
हैदर अली आतिश
हाजत नहीं बनाओ की ऐ नाज़नीं तुझे
हैदर अली आतिश
गुल आते हैं हस्ती में अदम से हमा-तन-गोश
हैदर अली आतिश
फ़स्ल-ए-बहार आई पियो सूफ़ियो शराब
हैदर अली आतिश
दुनिया ओ आख़िरत में तलबगार हैं तिरे
हैदर अली आतिश
दोस्तों से इस क़दर सदमे उठाए जान पर
हैदर अली आतिश
दिल की कुदूरतें अगर इंसाँ से दूर हों
हैदर अली आतिश
बुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइए
हैदर अली आतिश
भरा है शीशा-ए-दिल को नई मोहब्बत से
हैदर अली आतिश
बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के
हैदर अली आतिश
बयाँ ख़्वाब की तरह जो कर रहा है
हैदर अली आतिश