Couplets Poetry (page 428)
हाँ आप को देखा था मोहब्बत से हमीं ने
एहसान दानिश
फ़ुसून-ए-शेर से हम उस मह-ए-गुरेज़ाँ को
एहसान दानिश
'एहसान' अपना कोई बुरे वक़्त का नहीं
एहसान दानिश
'एहसान' ऐसा तल्ख़ जवाब-ए-वफ़ा मिला
एहसान दानिश
दिल की शगुफ़्तगी के साथ राहत-ए-मय-कदा गई
एहसान दानिश
दमक रहा है जो नस नस की तिश्नगी से बदन
एहसान दानिश
बला से कुछ हो हम 'एहसान' अपनी ख़ू न छोड़ेंगे
एहसान दानिश
ब-जुज़ उस के 'एहसान' को क्या समझिए
एहसान दानिश
और कुछ देर सितारो ठहरो
एहसान दानिश
आज उस ने हँस के यूँ पूछा मिज़ाज
एहसान दानिश
ये दिल अजीब है अक्सर कमाल करता है
डॉ. पिन्हाँ
पत्थर न बना दे मुझे मौसम की ये सख़्ती
डॉ. पिन्हाँ
मैं शर की शरारत से तो होश्यार हूँ लेकिन
डॉ. पिन्हाँ
ख़्वाब देखे थे टूट कर मैं ने
डॉ. पिन्हाँ
वक़्त को बस गुज़ार लेना ही
दिवाकर राही
वक़्त बर्बाद करने वालों को
दिवाकर राही
वक़ार-ए-ख़ून-ए-शहीदान-ए-कर्बला की क़सम
दिवाकर राही
सोचने की ये बात है 'राही'
दिवाकर राही
सवाल ये है कि इस पुर-फ़रेब दुनिया में
दिवाकर राही
इस से पहले कि लोग पहचानें
दिवाकर राही
इस इंतिज़ार में बैठे हैं उन की महफ़िल में
दिवाकर राही
इस दौर-ए-तरक़्क़ी के अंदाज़ निराले हैं
दिवाकर राही
ग़ुस्से में बरहमी में ग़ज़ब में इताब में
दिवाकर राही
बहुत आसान है दो घूँट पी लेना तो ऐ 'राही'
दिवाकर राही
बात हक़ है तो फिर क़ुबूल करो
दिवाकर राही
ऐन-फ़ितरत है कि जिस शाख़ पे फल आएँगे
दिवाकर राही
अगर मौजें डुबो देतीं तो कुछ तस्कीन हो जाती
दिवाकर राही
अगर ऐ नाख़ुदा तूफ़ान से लड़ने का दम-ख़म है
दिवाकर राही
अबस इल्ज़ाम मत दो मुश्किलात-ए-राह को 'राही'
दिवाकर राही
अब तो उतनी भी मयस्सर नहीं मय-ख़ाने में
दिवाकर राही