Couplets Poetry (page 430)

क्या जाने किस ख़याल से छोड़ा प हाल-ए-ज़ार

दिल शाहजहाँपुरी

हुस्न-ए-ख़ुद-बीं को हुआ और सिवा नाज़-ए-हिजाब

दिल शाहजहाँपुरी

हम को बेचैन किए जाते हैं

दिल शाहजहाँपुरी

असर-ए-इश्क़ से हूँ सूरत-ए-शम्अ ख़ामोश

दिल शाहजहाँपुरी

आरज़ू लुत्फ़ तलब इश्क़ सरासर नाकाम

दिल शाहजहाँपुरी

आग़ाज़-ए-मोहब्बत से अंजाम-ए-मोहब्बत तक

दिल शाहजहाँपुरी

ये राह-ए-इश्क़ है आख़िर कोई मज़ाक़ नहीं

दिल अय्यूबी

ये दिलचस्प वादे ये रंगीं दिलासे

दिल अय्यूबी

फिर मरहला-ए-ख़्वाब-ए-बहाराँ से गुज़र जा

दिल अय्यूबी

न गिर्द-ओ-पेश से इस दर्जा बे-नियाज़ गुज़र

दिल अय्यूबी

लम्हा लम्हा मुझे वीरान किए देता है

दिल अय्यूबी

कहाँ मैं अभी तक नज़र आ सका हूँ

दिल अय्यूबी

इस शहर में तो कुछ नहीं रुस्वाई के सिवा

दिल अय्यूबी

फ़रिश्ता है तो तक़द्दुस तुझे मुबारक हो

दिल अय्यूबी

यारब तू मुझे मेरे गुनाहों की सज़ा दे

दीप्ति मिश्रा

यक क़दम राह-ए-दोस्त है 'दाऊद'

दाऊद औरंगाबादी

तुझ हिज्र की अगन कूँ बूझाने ऐ संग दिल

दाऊद औरंगाबादी

सुन नसीहत मिरी ऐ ज़ाहिद-ए-ख़ुश्क

दाऊद औरंगाबादी

शीशा-ए-आबरू सँभाल ऐ दिल

दाऊद औरंगाबादी

सर काट क्यूँ जलाते हैं रौशन दिलाँ के तईं

दाऊद औरंगाबादी

रक़म करने कूँ वस्फ़-ए-ज़ुल्फ़-ए-दिलदार

दाऊद औरंगाबादी

पिव बिना दिल मिरा उदासी है

दाऊद औरंगाबादी

हर किताब-ए-सोहबत-ए-रंगीं के मअ'नी देख कर

दाऊद औरंगाबादी

दिया उस ख़ुश-नयन ने रात कूँ मुझ कूँ सुराग़ अपना

दाऊद औरंगाबादी

देखना है पिया की ज़ुल्फ़-ए-दराज़

दाऊद औरंगाबादी

या इलाही मुझ को ये क्या हो गया

दत्तात्रिया कैफ़ी

वफ़ा पर दग़ा सुल्ह में दुश्मनी है

दत्तात्रिया कैफ़ी

तुम से अब क्या कहें वो चीज़ है दाग़-ए-ग़म-ए-इश्क़

दत्तात्रिया कैफ़ी

सब कुछ है और कुछ भी नहीं दहर का वजूद

दत्तात्रिया कैफ़ी

कोई दिल-लगी दिल लगाना नहीं है

दत्तात्रिया कैफ़ी