Couplets Poetry (page 431)

इश्क़ ने जिस दिल पे क़ब्ज़ा कर लिया

दत्तात्रिया कैफ़ी

इक ख़्वाब का ख़याल है दुनिया कहें जिसे

दत्तात्रिया कैफ़ी

ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

दैर ओ काबा में भटकते फिर रहे हैं रात दिन

दत्तात्रिया कैफ़ी

ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ज़िक्र मेरा ही वो करता था सरीहन लेकिन

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ज़ालिम जफ़ा जो चाहे सो कर मुझ पे तू वले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

या-रब ये क्या तिलिस्म है इदराक-ओ-फ़हम याँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

यक-ब-यक नाम ले उठा मेरा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

वहदत में तेरी हर्फ़ दुई का न आ सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

वाए नादानी कि वक़्त-ए-मर्ग ये साबित हुआ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

उन लबों ने न की मसीहाई

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

टुक ख़बर ले कि हर घड़ी हम को

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तमन्ना तिरी है अगर है तमन्ना

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

शम्अ के मानिंद हम इस बज़्म में

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

साक़िया! याँ लग रहा है चल-चलाव

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

साक़ी मिरे भी दिल की तरफ़ टुक निगाह कर

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

सल्तनत पर नहीं है कुछ मौक़ूफ़

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

सैर-ए-बहार-ए-बाग़ से हम को मुआ'फ़ कीजिए

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

रौंदे है नक़्श-ए-पा की तरह ख़ल्क़ याँ मुझे

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

रात मज्लिस में तिरे हुस्न के शोले के हुज़ूर

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़त्ल से मेरे वो जो बाज़ रहा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़ासिद नहीं ये काम तिरा अपनी राह ले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ने गुल को है सबात न हम को है ए'तिबार

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

नहीं शिकवा मुझे कुछ बेवफ़ाई का तिरी हरगिज़

ख़्वाजा मीर 'दर्द'