Couplets Poetry (page 432)
न रह जावे कहीं तू ज़ाहिदा महरूम रहमत से
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मुझे ये डर है दिल-ए-ज़िंदा तू न मर जाए
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मत जा तर-ओ-ताज़गी पे उस की
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
खुल नहीं सकती हैं अब आँखें मेरी
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
खुल नहीं सकती हैं अब आँखें मिरी
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
काश उस के रू-ब-रू न करें मुझ को हश्र में
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
कमर ख़मीदा नहीं बे-सबब ज़ईफ़ी में
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
कहते न थे हम 'दर्द' मियाँ छोड़ो ये बातें
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
कभू रोना कभू हँसना कभू हैरान हो जाना
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
जी की जी ही में रही बात न होने पाई
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
जग में आ कर इधर उधर देखा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
जान से हो गए बदन ख़ाली
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हम भी जरस की तरह तो इस क़ाफ़िले के साथ
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हो गया मेहमाँ-सरा-ए-कसरत-ए-मौहूम आह
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हर-चंद तुझे सब्र नहीं दर्द व-लेकिन
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हमें तो बाग़ तुझ बिन ख़ाना-ए-मातम नज़र आया
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
है ग़लत गर गुमान में कुछ है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हाल मुझ ग़म-ज़दा का जिस जिस ने
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
ग़ाफ़िल ख़ुदा की याद पे मत भूल ज़ीनहार
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
गली से तिरी दिल को ले तो चला हूँ
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
एक ईमान है बिसात अपनी
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
दुश्मनी ने सुना न होवेगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
दिल भी तेरे ही ढंग सीखा है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
दिल भी ऐ 'दर्द' क़तरा-ए-ख़ूँ था
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
दर्द-ए-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान को
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
दर्द तू जो करे है जी का ज़ियाँ
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
'दर्द' कुछ मालूम है ये लोग सब
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
'दर्द' के मिलने से ऐ यार बुरा क्यूँ माना
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
बावजूदे कि पर-ओ-बाल न थे आदम के
ख़्वाजा मीर 'दर्द'