Couplets Poetry (page 427)
शायद अभी बाक़ी है कुछ आग मोहब्बत की
एहसान दरबंगावी
शौक़ के मुम्किनात को दोनों ही आज़मा चुके
एहसान दरबंगावी
नज़र आती है सारी काएनात-ए-मै-कदा रौशन
एहसान दरबंगावी
बड़ी मुश्किलों से काटा बड़े कर्ब से गुज़ारा
एहसान दरबंगावी
ज़ब्त भी सब्र भी इम्कान में सब कुछ है मगर
एहसान दानिश
ये उजालों के जज़ीरे ये सराबों के दयार
एहसान दानिश
ये उड़ी उड़ी सी रंगत ये खुले खुले से गेसू
एहसान दानिश
ये कौन हँस के सेहन-ए-चमन से गुज़र गया
एहसान दानिश
वफ़ा का अहद था दिल को सँभालने के लिए
एहसान दानिश
उट्ठा जो अब्र दिल की उमंगें चमक उठीं
एहसान दानिश
तुम सादा-मिज़ाजी से मिटे फिरते हो जिस पर
एहसान दानिश
सुनता हूँ सुरंगों थे फ़रिश्ते मिरे हुज़ूर
एहसान दानिश
शोरिश-ए-इश्क़ में है हुस्न बराबर का शरीक
एहसान दानिश
सता लो मुझे ज़िंदगी में सता लो
एहसान दानिश
रहता नहीं इंसान तो मिट जाता है ग़म भी
एहसान दानिश
न जाने मोहब्बत का अंजाम क्या है
एहसान दानिश
मरने वाले फ़ना भी पर्दा है
एहसान दानिश
मक़्सद-ए-ज़ीस्त ग़म-ए-इश्क़ है सहरा हो कि शहर
एहसान दानिश
मैं जिस रफ़्तार से तूफ़ाँ की जानिब बढ़ता जाता हूँ
एहसान दानिश
मैं हैराँ हूँ कि क्यूँ उस से हुई थी दोस्ती अपनी
एहसान दानिश
लोग यूँ देख के हँस देते हैं
एहसान दानिश
कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर
एहसान दानिश
कुछ अपने साज़-ए-नफ़स की न क़द्र की तू ने
एहसान दानिश
किसे ख़बर थी कि ये दौर-ए-ख़ुद-ग़रज़ इक दिन
एहसान दानिश
किस किस की ज़बाँ रोकने जाऊँ तिरी ख़ातिर
एहसान दानिश
ख़ाक से सैंकड़ों उगे ख़ुर्शीद
एहसान दानिश
कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम
एहसान दानिश
हुस्न को दुनिया की आँखों से न देख
एहसान दानिश
हम हक़ीक़त हैं तो तस्लीम न करने का सबब
एहसान दानिश
हम चटानें हैं कोई रेत के साहिल तो नहीं
एहसान दानिश