Couplets Poetry (page 499)
तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवर
असर लखनवी
सना तेरी नहीं मुमकिन ज़बाँ से
असर लखनवी
क़ासिद पयाम उन का न कुछ देर अभी सुना
असर लखनवी
फिरते हुए किसी की नज़र देखते रहे
असर लखनवी
पलकें घनेरी गोपियों की टोह लिए हुए
असर लखनवी
क्या क्या दुआएँ माँगते हैं सब मगर 'असर'
असर लखनवी
कुछ देर फ़िक्र आलम-ए-बाला की छोड़ दो
असर लखनवी
करम पर भी होता है धोका सितम का
असर लखनवी
जो सज़ा दीजे है बजा मुझ को
असर लखनवी
जो आप कहें उस में ये पहलू है वो पहलू
असर लखनवी
इश्क़ से लोग मना करते हैं
असर लखनवी
इधर से आज वो गुज़रे तो मुँह फेरे हुए गुज़रे
असर लखनवी
इक बात भला पूछें किस तरह मनाओगे
असर लखनवी
भूलने वाले को शायद याद वादा आ गया
असर लखनवी
बहाना मिल न जाए बिजलियों को टूट पड़ने का
असर लखनवी
आप का ख़त नहीं मिला मुझ को
असर लखनवी
आज कुछ मेहरबान है सय्याद
असर लखनवी
आह किस से कहें कि हम क्या थे
असर लखनवी
ज़िंदगी तुझ से ये गिला है मुझे
असर अकबराबादी
ज़िंदगी इक नई राह पर
असर अकबराबादी
उल्फ़त के बदले उन से मिला दर्द-ए-ला-इलाज
असर अकबराबादी
उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों
असर अकबराबादी
उदास हो न तू ऐ दिल किसी के रोने से
असर अकबराबादी
साया भी साथ छोड़ गया अब तो ऐ 'असर'
असर अकबराबादी
रास्ता रोक लिया मेरा किसी बच्चे ने
असर अकबराबादी
कितना मुश्किल है ख़ुद-बख़ुद रोना
असर अकबराबादी
जुनूँ की ख़ैर हो तुझ को 'असर' मिला सब कुछ
असर अकबराबादी
जो लोग डरते हैं रातों को अपने साए से
असर अकबराबादी
हम हुए दश्त-ए-नवर्द फिर भी न देखा तुझ को
असर अकबराबादी
है अजब सी कश्मकश दिल में 'असर'
असर अकबराबादी