Couplets Poetry (page 500)
फ़िक्र-ए-जहान दर्द-ए-मोहब्बत फ़िराक़-ए-यार
असर अकबराबादी
शराब बंद हो साक़ी के बस की बात नहीं
असद मुल्तानी
रहें न रिंद ये ज़ाहिद के बस की बात नहीं
असद मुल्तानी
असरार अगर समझे दुनिया की हर इक शय के
असद मुल्तानी
ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन
असद भोपाली
न बज़्म अपनी न अपना साक़ी न शीशा अपना न जाम अपना
असद भोपाली
न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
असद भोपाली
मैं अब तेरे सिवा किस को पुकारूँ
असद भोपाली
जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए
असद भोपाली
इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले
असद भोपाली
इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
असद भोपाली
हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे
असद भोपाली
ग़ुंचा ओ गुल माह ओ अंजुम सब के सब बेकार थे
असद भोपाली
फ़र्क़ इतना है कि तू पर्दे में और मैं बे-हिजाब
असद भोपाली
देखिए अहद-ए-वफ़ा अच्छा नहीं
असद भोपाली
बार-हा ये भी हुआ अंजुमन-ए-नाज़ से हम
असद भोपाली
अजब अंदाज़ के शाम-ओ-सहर हैं
असद भोपाली
ऐसे इक़रार में इंकार के सौ पहलू हैं
असद भोपाली
ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या
असद भोपाली
ये ताएरों की क़तारें किधर को जाती हैं
असअ'द बदायुनी
वो सारी बातें मैं अहबाब ही से कहता हूँ
असअ'द बदायुनी
वहाँ भी मुझ को ख़ुदा सर-बुलंद रखता है
असअ'द बदायुनी
तकल्लुफ़ात की नज़्मों का सिलसिला है सिवा
असअ'द बदायुनी
सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँ
असअ'द बदायुनी
शाख़ से टूट के पत्ते ने ये दिल में सोचा
असअ'द बदायुनी
सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं
असअ'द बदायुनी
पुराने घर की शिकस्ता छतों से उकता कर
असअ'द बदायुनी
फूलों की ताज़गी ही नहीं देखने की चीज़
असअ'द बदायुनी
परिंद पेड़ से परवाज़ करते जाते हैं
असअ'द बदायुनी
परिंद क्यूँ मिरी शाख़ों से ख़ौफ़ खाते हैं
असअ'द बदायुनी