Couplets Poetry (page 107)

ये अलग बात ज़बाँ साथ न दे पाएगी

शहज़ाद अहमद

यार होते तो मुझे मुँह पे बुरा कह देते

शहज़ाद अहमद

वो मुझे प्यार से देखे भी तो फिर क्या होगा

शहज़ाद अहमद

वो मिरी सुब्हों का तारा वो मिरी रातों का चाँद

शहज़ाद अहमद

वो कोई और है जिस ने तुझे चाहा होगा

शहज़ाद अहमद

वो ख़ुश-नसीब थे जिन्हें अपनी ख़बर न थी

शहज़ाद अहमद

वो कौन है उसे सूरज कहूँ कि रंग कहूँ

शहज़ाद अहमद

वाक़िआ ये है कि रस्ता और वीराँ हो गया

शहज़ाद अहमद

वाक़िआ कुछ भी हो सच कहने में रुस्वाई है

शहज़ाद अहमद

वीरान तो नहीं शब-ए-तारीक की फ़ज़ा

शहज़ाद अहमद

उट्ठी हैं मेरी ख़ाक से आफ़ात सब की सब

शहज़ाद अहमद

उस को ख़बर हुई तो बदल जाएगा वो रंग

शहज़ाद अहमद

उम्र जितनी भी कटी उस के भरोसे पे कटी

शहज़ाद अहमद

उम्र भर सुनता रहूँ अपनी सदा की बाज़गश्त

शहज़ाद अहमद

उम्र भर अपने गिरेबाँ से उलझने वाले

शहज़ाद अहमद

उड़ते हुए आते हैं अभी संग-ए-तमन्ना

शहज़ाद अहमद

उदास छोड़ गए कश्तियों को साहिल पर

शहज़ाद अहमद

तुम्हारी बज़्म से भी उठ चले हैं दीवाने

शहज़ाद अहमद

तुम्हारी आरज़ू में मैं ने अपनी आरज़ू की थी

शहज़ाद अहमद

तुम्हारी आँख में कैफ़िय्यत-ए-ख़ुमार तो है

शहज़ाद अहमद

तुम कहे जाते हो ऐसी फ़स्ल-ए-गुल आई नहीं

शहज़ाद अहमद

तुम ही क्या जज़्ब हो गए मुझ में

शहज़ाद अहमद

तुझ में कस-बल है तो दुनिया को बहा कर ले जा

शहज़ाद अहमद

तू कुछ भी हो कब तक तुझे हम याद करेंगे

शहज़ाद अहमद

तीरगी ही तीरगी हद्द-ए-नज़र तक तीरगी

शहज़ाद अहमद

ठहर गई है तबीअत इसे रवानी दे

शहज़ाद अहमद

तिरी तलाश तो क्या तेरी आस भी न रहे

शहज़ाद अहमद

तेरी क़ुर्बत में गुज़ारे हुए कुछ लम्हे हैं

शहज़ाद अहमद

तेरे सीने में भी इक दाग़ है तन्हाई का

शहज़ाद अहमद

तिरा मैं क्या करूँ ऐ दिल तुझे कुछ भी नहीं आता

शहज़ाद अहमद