Couplets Poetry (page 105)

दिल-ए-उश्शाक़ परिंदों की तरह उड़ते हैं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल-ए-सद-चाक मिरा राह यहाँ कब पाए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल-ए-नाज़ुक मिरा हाथों में सँभाले रखियो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल उस की तार-ए-ज़ुल्फ़ के बल में उलझ गया

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल था बग़ल में मुद्दई ख़ूब हुआ जो ग़म हुआ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल को मारा चश्म ने अबरू की तलवारों से आज

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल की लहरों का तूल-ओ-अर्ज़ न पूछ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल देखते ही उस को गिरफ़्तार हो गया

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देखूँ हूँ तुझ को दूर से बैठा हज़ार कोस

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देख कर हर उज़्व उन का दिल हो पानी बह चला

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दे के दिल उस के हाथ अपने हाथ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दे के दिल हाथ तिरे अपने हाथ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दौरा है जब से बज़्म में तेरी शराब का

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दर-ओ-दीवार-ए-चमन आज हैं ख़ूँ से लबरेज़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दर्द तू मेरे पास से मरते तलक न जाइयो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दहन है तंग शकर और शकर है तिरा है कलाम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

छुपाता क्या है मुँह कब तक छुपेगा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

छल-बल उस की निगाह का मत पूछ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चाँद से तुझ को जो दे निस्बत सो बे-इंसाफ़ है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चमन ख़राब किया, हो ख़िज़ाँ का ख़ाना-ख़राब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चला जाता था 'हातिम' आज कुछ वाही-तबाही सा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चला जा मोहतसिब मस्जिद में 'हातिम' से न बहसा कर

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बुल-हवस गो करें तेरे लब-ए-शीरीं पर हुजूम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बाज़ार से आए हाथ ख़ाली

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ब-तंग आया हूँ इस जाहिल के हाथों इस क़दर 'हातिम'

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बस नहीं चलता जो उस दम उन के ऊपर गर पड़े

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बैत-बहसी न कर ऐ फ़ाख़्ता गुलशन में कि आज

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बदन पर कुछ मिरे ज़ाहिर नहीं और दिल में सोज़िश है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

अज़ल से दिल है सज्दा में तिरे अबरू के मस्जिद में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

असीरों का नहीं कुछ शोर-ओ-ग़ुल ये आज ज़िंदाँ में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम