Couplets Poetry (page 103)

कभू जो शैख़ दिखाऊँ मैं अपने बुत के तईं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कभू बीमार सुन कर वो अयादत को तो आता था

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कब ये दिल ओ दिमाग़ है मिन्नत-ए-शम्अ खींचिए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जुनूँ है फ़ौज फ़ौज और इस तरफ़ 'हातिम' अकेला है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो जी में आवे तो टुक झाँक अपने दिल की तरफ़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो अज़ल में क़लम चली सो चली

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जिस तरफ़ को मैं गया रोता हुआ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जिस ने पाया उसे सो है ख़ामोश

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जिस के मुँह की उतर गई लोई

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जी उठूँ फिर कर अगर तू एक बोसा दे मुझे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जवाब-ए-नामा या देता नहीं या क़ैद करता है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जामा उर्यानी का क़ामत पर मिरी आया है रास्त

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जब तक कि गरेबान में यक तार रहेगा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जब से तेरी नज़र पड़ी है झलक

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जब पुकारे है वो अबे ओ होत

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जब हुए 'हातिम' हम उस से आश्ना

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जाने न पाए उस को जहाँ हो तहाँ से लाओ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जा भिड़ाता है हमेशा मुझे ख़ूँ-ख़्वारों से

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इतना मैं इंतिज़ार किया उस की राह में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़-बाज़ी बुल-हवस बाज़ी न जान

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ उस का आन कर यक-बारगी सब ले गया

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ ने किश्वर-ए-दिल लूटा है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ की राह में मैं मस्त की तरह

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ है दारुश्शिफ़ा और दर्द है उस का तबीब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस ज़माने में न हो क्यूँकर हमारा दिल उदास

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस क़दर की सर्फ़ तस्ख़ीर-ए-परी-रूयाँ में उम्र

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस क़दर बस-कि रोज़ मिलने से

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस दुख में हाए यार यगाने किधर गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इन दिनों सब को हुआ है साफ़-गोई का तलाश

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इन दिनों हम से जो वहशी की तरह भड़को हो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम