Couplets Poetry (page 101)

नहीं है शिकवा अगर वो नज़र नहीं आता

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न मैं ने कुछ कहा तुझ से न तू ने मुझ से कुछ पूछा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न कुछ सितम से तिरे आह आह करता हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुल्क-ए-अदम से दहर के मातम-कदे के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुझे तावीज़ लिख दो ख़ून-ए-आहू से कि ऐ स्यानो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुझे क्या देख कर तू तक रहा है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुद्दत से ख़्वाब में भी नहीं नींद का ख़याल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुद्दत से आरज़ू है ख़ुदा वो घड़ी करे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुद्दत हुई पलक से पलक आश्ना नहीं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मोतकिफ़ हो शैख़ अपने दिल में मस्जिद से निकल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मेरी फ़रियाद कोई नईं सुनता

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मिरी बातों से अब आज़ुर्दा न होना साक़ी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मेरे हवास-ए-ख़मसा उसे देख उड़ गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मेरे आँसू के पोछने को मियाँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मेरा माशूक़ है मज़ों में भरा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मिरा दिल बार-ए-इश्क़ ऐसा उठाने में दिलावर है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मज़रा-ए-दुनिया में दाना है तो डर कर हाथ डाल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मज़हर-ए-हक़ कब नज़र आता है इन शैख़ों के तईं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मौसम-ए-गुल का मगर क़ाफ़िला जाता है कि आज

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मस्तों का दिल है शीशा और संग-दिल है साक़ी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मस्जिद में सर पटकता है तो जिस के वास्ते

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मशरब में तो दुरुस्त ख़राबातियों के है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मालूम है किसू को कि वो आज शोला-ख़ू

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मज्लिस में रात गिर्या-ए-मस्ताँ था तुझ बग़ैर

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं उस की चश्म से ऐसा गिरा हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं पीर हो गया हूँ और अब तक जवाँ है दर्द

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं कुफ़्र ओ दीं से गुज़र कर हुआ हूँ ला-मज़हब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं जितना ढूँढता हूँ उस को उतना ही नहीं पाता

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं जाँ-ब-लब हूँ ऐ तक़दीर तेरे हाथों से

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम