Couplets Poetry (page 102)

क्यूँकर इन काली बलाओं से बचेगा आशिक़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

क्यूँ मोज़ाहिम है मेरे आने से

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

क्या मदरसे में दहर के उल्टी हवा बही

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

क्या बड़ा ऐब है इस जामा-ए-उर्यानी में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कोई है सुर्ख़-पोश कोई ज़र्द-पोश है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कोई बतलाता नहीं आलम में उस के घर की राह

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कोहकन जाँ-कनी है मुश्किल काम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किया था दिन का वादा रात को आया तो क्या शिकवा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किसू मशरब में और मज़हब में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किस तरह से गुज़ार करूँ राह-ए-इश्क़ में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किस तरह पहुँचूँ मैं अपने यार किन पंजाब में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किस से कहूँ मैं हाल-ए-दिल अपना कि ता सुने

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ख़ुम-ख़ाना मय-कशों ने किया इस क़दर तही

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

खुल गई जिस की आँख मिस्ल-ए-हबाब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ख़ुदा को जिस से पहुँचें हैं वो और ही राह है ज़ाहिद

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ख़ुदा के वास्ते उस से न बोलो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ख़ूबान-ए-जहाँ हों जिस से तस्ख़ीर

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

खेल सब छोड़ खेल अपना खेल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ख़ाकसारों का दिल ख़ज़ीना है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ख़ाक कर देवे जला कर पहले फिर टिसवे बहाए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

केसर में इस तरह से आलूदा है सरापा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कपड़े सफ़ेद धो के जो पहने तो क्या हुआ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कलेजा मुँह को आया और नफ़स करने लगा तंगी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कई फ़रहाद हैं जूया तिरे शीरीं लब के

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कई दीवान कह चुका 'हातिम'

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कहो तो किस तरह आवे वहाँ नींद

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कहें हम बहर-ए-बे-पायान-ए-ग़म की माहियत किस से

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कहाँ है दिल जो कहूँ होवे आ के दीवाना

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कभू तू रो तो उस को ख़ाक ऊपर जा के ऐ लैला

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कभू पहुँची न उस के दिल तलक रह ही में थक बैठी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम