Couplets Poetry (page 104)

इलाही तुझ से अब कहता है 'हातिम' इस ज़माने में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हुस्न आईना फ़ाश करता है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हम तिरी राह में जूँ नक़्श-ए-क़दम बैठे हैं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हम सीं मस्तों को बस है तेरी निगाह

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हम छनालों की छोड़ दी यारी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हम बहुत देखे फ़रंगिस्तान के हुस्न-ए-सबीह

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

'हातिम' उस ज़ुल्फ़ की तरफ़ मत देख

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

'हातिम' उस ज़ालिम के अबरू को न छेड़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हाथ में देख कर तिरे मरहम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हाथ आता नहीं बग़ैर नसीब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हस्ती से ता-अदम है सफ़र दो क़दम की राह

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हक़ से मिलना गेरवे कपड़ों उपर मौक़ूफ़ नईं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हक़ रखे उस को सलामत हिन्द में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हमारी गुफ़्तुगू सब से जुदा है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हमारी अक़्ल-ए-बे-तदबीर पर तदबीर हँसती है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हाजत चराग़ की है कब अंजुमन में दिल के

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हैराँ हैं अपने अपने जो देखा सो काम में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

है राह-ए-आशिक़ी तारीक और बारीक और सुकड़ी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

है कभू दिल में कभू जी में कभू आँखों के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

है अबस 'हातिम' ये सब मज़मून ओ मअ'नी का तलाश

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

गुलशन-ए-दहर में सौ रंग हैं 'हातिम' उस के

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

घर-ब-घर है वो मस्त-ए-इश्वा-ओ-नाज़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

गली में उस की न देखा कभू किसी को मगर

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

गदा को गर क़नाअत हो तो फाटा चीथड़ा बस है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

फ़िल-हक़ीक़त कोई नहीं मरता

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

फ़ानूस तन में देख ले रौशन हैं जूँ चराग़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

एक दिन पूछा न 'हातिम' को कभू उस ने कि दोस्त

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

एक बोसा माँगता है तुम से 'हातिम' सा गदा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दोस्तों से दुश्मनी और दुश्मनों से दोस्ती

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम