Couplets Poetry (page 99)

वस्फ़ अँखियों का लिखा हम ने गुल-ए-बादाम पर

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

वक़्त फ़ुर्सत दे तो मिल बैठें कहीं बाहम दो दम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

उस वक़्त दिल मिरा तिरे पंजे के बीच था

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

टूटे दिल को बना दिखावे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तुम्हारी देख सज ऐ तंग-पोशो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तुम्हारे इश्क़ में हम नंग-ओ-नाम भूल गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तुम तो बैठे हुए पुर-आफ़त हो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तुम कि बैठे हुए इक आफ़त हो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तू ने ग़ारत किया घर बैठे घर इक आलम का

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तू जो मूसा हो तो उस का हर तरफ़ दीदार है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तू अपने मन का मनका फेर ज़ाहिद वर्ना क्या हासिल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तीर-ए-निगह लगा के तुम कहते हो फिर लगा न ख़ूब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरी निगह से गए खुल किवाड़ छाती के

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरी मेहराब में अबरू की ये ख़ाल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरी जो ज़ुल्फ़ का आया ख़याल आँखों में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरे रुख़्सार से बे-तरह लिपटी जाए है ज़ालिम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तेरे आने से यू ख़ुशी है दिल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तेरे आगे ले चुका ख़ुसरव लब-ए-शीरीं से काम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तन्हाई से आती नहीं दिन रात मुझे नींद

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तबीबों की तवज्जोह से मरज़ होने लगा दूना

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ताबे रज़ा का उस की अज़ल सीं किया मुझे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तब्अ तेरी अजब तमाशा है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

स्वाद-ए-ख़ाल के नुक़्ते की ख़ूबी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

सुनो हिन्दू मुसलमानो कि फ़ैज़-ए-इश्क़ से 'हातिम'

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

शम्अ हर शाम तेरे रोने पर

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

शैख़ उस की चश्म के गोशे से गोशे हो कहीं

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

शहर में चर्चा है अब तेरी निगाह-ए-तेज़ का

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

सौ बार तार तार किया तो भी अब तलक

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

साक़ी मुझे ख़ुमार सताए है ला शराब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

समझते हम नहीं जो तुम इशारों बीच कहते हो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम