Couplets Poetry (page 421)

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ग़म-ए-जहाँ हो रुख़-ए-यार हो कि दस्त-ए-अदू

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तो देखो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़रेब-ए-आरज़ू की सहल-अँगारी नहीं जाती

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दिल से तो हर मोआमला कर के चले थे साफ़ हम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चंग ओ नय रंग पे थे अपने लहू के दम से

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चमन पे ग़ारत-ए-गुल-चीं से जाने क्या गुज़री

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बे-दम हुए बीमार दवा क्यूँ नहीं देते

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

और क्या देखने को बाक़ी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ऐ ज़ुल्म के मातो लब खोलो चुप रहने वालो चुप कब तक

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अगर शरर है तो भड़के जो फूल है तो खिले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अदा-ए-हुस्न की मासूमियत को कम कर दे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कहा फ़लक ने ये उड़ते हुए परिंदों से

फ़ैसल सईद फ़ैसल

दर्द ने दिल की परवरिश की है

फ़ैसल सईद फ़ैसल

जिसे कल रात भर पूजा गया था

फ़ैसल अज़ीम

उस को जाने दे अगर जाता है

फ़ैसल अजमी

टूटता है तो टूट जाने दो

फ़ैसल अजमी

तू ख़्वाब-ए-दिगर है तिरी तदफ़ीन कहाँ हो

फ़ैसल अजमी

शजर से बिछड़ा हुआ बर्ग-ए-ख़ुश्क हूँ 'फ़ैसल'

फ़ैसल अजमी