Couplets Poetry (page 422)

रोज़ आसेब आते जाते हैं

फ़ैसल अजमी

रात सितारों वाली थी और धूप भरा था दिन

फ़ैसल अजमी

मैं ज़ख़्म खा के गिरा था कि थाम उस ने लिया

फ़ैसल अजमी

मैं सो गया तो कोई नींद से उठा मुझ में

फ़ैसल अजमी

क्या इल्म कि रोते हों तो मर जाते हों 'फ़ैसल'

फ़ैसल अजमी

ख़ौफ़ ग़र्क़ाब हो गया 'फ़ैसल'

फ़ैसल अजमी

कभी देखा ही नहीं इस ने परेशाँ मुझ को

फ़ैसल अजमी

कभी भुलाया कभी याद कर लिया उस को

फ़ैसल अजमी

जिस्म थकता नहीं चलने से कि वहशत का सफ़र

फ़ैसल अजमी

हर्फ़ अपने ही मआनी की तरह होता है

फ़ैसल अजमी

'फ़ैसल' मुकालिमा था हवाओं का फूल से

फ़ैसल अजमी

चंद ख़ुशियों को बहम करने में

फ़ैसल अजमी

अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है

फ़ैसल अजमी

अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली

फ़ैसल अजमी

आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में

फ़ैसल अजमी

आज फिर आईना देखा है कई साल के बाद

फ़ैसल अजमी

उसे ले कर जो गाड़ी जा चुकी है

फ़हमी बदायूनी

शहसवारों ने रौशनी माँगी

फ़हमी बदायूनी

पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा

फ़हमी बदायूनी

परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के

फ़हमी बदायूनी

निगाहें करती रह जाती हैं हिज्जे

फ़हमी बदायूनी

मैं ने उस की तरफ़ से ख़त लिक्खा

फ़हमी बदायूनी

ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी

फ़हमी बदायूनी

ख़ूँ पिला कर जो शेर पाला था

फ़हमी बदायूनी

बदन का ज़िक्र बातिल है तो आओ

फ़हमी बदायूनी

आप तशरीफ़ लाए थे इक रोज़

फ़हमी बदायूनी

आज पैवंद की ज़रूरत है

फ़हमी बदायूनी

ज़िंदगी अब तू मुझे और खिलौने ला दे

फ़हीम शनास काज़मी

ज़मीन पर न रहे आसमाँ को छोड़ दिया

फ़हीम शनास काज़मी

यूँ जगमगा उठा है तिरी याद से वजूद

फ़हीम शनास काज़मी