Couplets Poetry (page 50)

मैं तो किसी जुलूस में गया नहीं

विकास शर्मा राज़

लफ़्ज़ की क़ैद-ओ-रिहाई का हुनर

विकास शर्मा राज़

कौन तहलील हुआ है मुझ में

विकास शर्मा राज़

जिसे देखो ग़ज़ल पहने हुए है

विकास शर्मा राज़

जिन का सूझा न कुछ जवाब हमें

विकास शर्मा राज़

इश्क़ बीनाई बढ़ा देता है

विकास शर्मा राज़

इरादा तो नहीं है ख़ुद-कुशी का

विकास शर्मा राज़

हमारे दरमियाँ जो उठ रही थी

विकास शर्मा राज़

घर में वही पीली तन्हाई रहती है

विकास शर्मा राज़

फ़क़त ज़ंजीर बदली जा रही थी

विकास शर्मा राज़

एक किरन फिर मुझ को वापस खींच गई

विकास शर्मा राज़

एक बरस और बीत गया

विकास शर्मा राज़

देखना चाहता हूँ गुम हो कर

विकास शर्मा राज़

देखना चाहता हूँ गुम हो कर

विकास शर्मा राज़

दश्त की ख़ाक भी छानी है

विकास शर्मा राज़

बला का हब्स था पर नींद टूटती ही न थी

विकास शर्मा राज़

असर है ये हमारी दस्तकों का

विकास शर्मा राज़

ऐसी प्यास और ऐसा सब्र

विकास शर्मा राज़

उस से यही कहता हूँ वाजिब एहतिराम-ए-इश्क़ है

वारिस किरमानी

हम नींद की चादर में लिपटे हुए चलते हैं

वारिस किरमानी

शिकस्त-ए-साग़र-ए-दिल की सदाएँ सुन रहा हूँ मैं

वहशी कानपुरी

घटाएँ ऊदी ऊदी मै-कदा बर-दोश-ए-फ़स्ल-ए-गुल

वहशी कानपुरी

मिलती है ग़म से रूह को इक लज़्ज़त-ए-हयात

वफ़ा मलिकपुरी

क़दम क़दम पे मैं सँभला हूँ ठोकरें खा कर

उरूज ज़ैदी बदायूनी

इस दिलबरी की शान के क़ुर्बान जाइए

उरूज ज़ैदी बदायूनी

गया क़रीब जो परवाना रह गया जल कर

उरूज ज़ैदी बदायूनी

ज़िंदगी राज़ी नहीं थी ग़म उठाने के लिए

उर्मिलामाधव

वो आए जाता है कब से पर आ नहीं जाता

उर्फ़ी आफ़ाक़ी

मालूम है 'उर्फ़ी' जो है क़िस्मत में हमारी

उर्फ़ी आफ़ाक़ी

दीवाना-वार नाचिये हँसिए गुलों के साथ

उर्फ़ी आफ़ाक़ी