Couplets Poetry (page 52)
वो चुप लगी है कि हँसता है और न रोता है
उमर अंसारी
वही दिया कि थीं आजिज़ हवाएँ जिन से 'उमर'
उमर अंसारी
उठा ये शोर वहीं से सदाओं का क्यूँ-कर
उमर अंसारी
उस इक दिए से हुए किस क़दर दिए रौशन
उमर अंसारी
तारी है हर तरफ़ जो ये आलम सुकूत का
उमर अंसारी
मुसाफ़िरों से मोहब्बत की बात कर लेकिन
उमर अंसारी
जो तीर आया गले मिल के दिल से लौट गया
उमर अंसारी
छुप कर न रह सकेगा वो हम से कि उस को हम
उमर अंसारी
चले जो धूप में मंज़िल थी उन की
उमर अंसारी
बुरा सही मैं प नीयत बुरी नहीं मेरी
उमर अंसारी
बाहर बाहर सन्नाटा है अंदर अंदर शोर बहुत
उमर अंसारी
अक्सर हुआ है ये कि ख़ुद अपनी तलाश में
उमर अंसारी
ये तो सच है कि वो सितमगर है
उमैर मंज़र
ये मेरे साथी हैं प्यारे साथी मगर इन्हें भी नहीं गवारा
उमैर मंज़र
यहाँ हम ने किसी से दिल लगाया ही नहीं 'मंज़र'
उमैर मंज़र
तज़्किरा हो तिरा ज़माने में
उमैर मंज़र
सुना ये था बहुत आसूदा हैं साहिल के बाशिंदे
उमैर मंज़र
साथी मिरे कहाँ से कहाँ तक पहुँच गए
उमैर मंज़र
इस महफ़िल में मैं भी क्या बेबाक हुआ
उमैर मंज़र
हर बार ही मैं जान से जाने में रह गया
उमैर मंज़र
बढ़ते चले गए जो वो मंज़िल को पा गए
उमैर मंज़र
साक़ी कुछ आज तुझ को ख़बर है बसंत की
उफ़ुक़ लखनवी
ये बिफरती मौज अंदेशे समुंदर और मैं
तुफ़ैल चतुर्वेदी
वो मौसमों पर उछालता है सवाल कितने
तुफ़ैल चतुर्वेदी
उस के वा'दे के एवज़ दे डाली अपनी ज़िंदगी
तुफ़ैल चतुर्वेदी
सफ़र अंजाम तक पहुँचे तो कैसे
तुफ़ैल चतुर्वेदी
सभी ज़ख़्मों के टाँके खुल गए हैं
तुफ़ैल चतुर्वेदी
नफ़रतों का अक्स भी पड़ने न देना ज़ेहन पर
तुफ़ैल चतुर्वेदी
कभी ज़माना था उस की तलब में रहते थे
तुफ़ैल चतुर्वेदी
हम बुज़ुर्गों की रिवायत से जुड़े हैं भाई
तुफ़ैल चतुर्वेदी