Couplets Poetry (page 508)
बे-सबब ग़ुंचे चटकते नहीं गुलज़ारों में
अरशद अली ख़ान क़लक़
बे-अब्र रिंद पीते नहीं वाइ'ज़ो शराब
अरशद अली ख़ान क़लक़
बराबर एक से मिस्रा नज़र आते हैं अबरू के
अरशद अली ख़ान क़लक़
बना कर तिल रुख़-ए-रौशन पर दो शोख़ी से से कहते हैं
अरशद अली ख़ान क़लक़
बहार आते ही ज़ख़्म-ए-दिल हरे सब हो गए मेरे
अरशद अली ख़ान क़लक़
बा'द मेरे जो किया शाद किसी को तो कहा
अरशद अली ख़ान क़लक़
अपने बेगाने से अब मुझ को शिकायत न रही
अरशद अली ख़ान क़लक़
ऐ परी-ज़ाद जो तू रक़्स करे मस्ती में
अरशद अली ख़ान क़लक़
ऐ बे-ख़ुदी-ए-दिल मुझे ये भी ख़बर नहीं
अरशद अली ख़ान क़लक़
अगर न जामा-ए-हस्ती मिरा निकल जाता
अरशद अली ख़ान क़लक़
अगर न जामा-ए-हस्ती मिरा निकल जाता
अरशद अली ख़ान क़लक़
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
आलम-ए-पीरी में क्या मू-ए-सियह का ए'तिबार
अरशद अली ख़ान क़लक़
आख़िर इंसान हूँ पत्थर का तो रखता नहीं दिल
अरशद अली ख़ान क़लक़
ज़मीं के पास किसी दर्द का इलाज नहीं
अरशद अब्दुल हमीद
ये किस को याद किया रूह की ज़रूरत ने
अरशद अब्दुल हमीद
ये इंतिज़ार नहीं शम्अ है रिफ़ाक़त की
अरशद अब्दुल हमीद
ये दुनिया अकबर ज़ुल्मों की हम मजबूरी की अनारकली
अरशद अब्दुल हमीद
उन्हें ये ज़ोम कि बे-सूद है सदा-ए-सुख़न
अरशद अब्दुल हमीद
सुख़न के चाक में पिन्हाँ तुम्हारी चाहत है
अरशद अब्दुल हमीद
सर-बुलंदी मिरी तंहाई तक आ पहुँची है
अरशद अब्दुल हमीद
मुद्दतों घाव किए जिस के बदन पर हम ने
अरशद अब्दुल हमीद
मिट्टी को चूम लेने की हसरत ही रह गई
अरशद अब्दुल हमीद
मिले जो उस से तो यादों के पर निकल आए
अरशद अब्दुल हमीद
मिरा ही सीना कुशादा है चाहतों के तईं
अरशद अब्दुल हमीद
मैं अपने आप को भी देखने से क़ासिर हूँ
अरशद अब्दुल हमीद
कुछ सितारे मिरी पलकों पे चमकते हैं अभी
अरशद अब्दुल हमीद
इश्क़ मरहून-ए-हिकायात-ओ-गुमाँ भी होगा
अरशद अब्दुल हमीद
हवेली छोड़ने का वक़्त आ गया 'अरशद'
अरशद अब्दुल हमीद
हमें तो शम्अ के दोनों सिरे जलाने हैं
अरशद अब्दुल हमीद