Couplets Poetry (page 70)

दिल की हर बात कह गए आँसू

सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी

देख कर काली घटा अहल-ए-क़फ़स

सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी

क्या मौसमों के टूटते रिश्तों का ख़ौफ़ है

सय्यद अारिफ़

वो मुझ से पूछने लगा मेरे सवाल अब

सय्यद अनवार अहमद

कुछ मारके हमारे भी हम तक ही रह गए

सय्यद अनवार अहमद

इस पल दो पल की हस्ती में

सय्यद अनवार अहमद

इन से आवाज़-ए-कर्ब आती है

सय्यद अनवार अहमद

फ़क़ीह-ए-शहर से कुछ ख़ास दुश्मनी तो नहीं

सय्यद अनवार अहमद

बोली लगी मता-ए-हुनर की तो अहल-ए-फ़न

सय्यद अनवार अहमद

अपने लिए भी कोई रिआयत रवा नहीं

सय्यद अनवार अहमद

मैं पर-शिकस्ता न था बादलों के बीच मगर

सय्यद अमीन अशरफ़

मैं देखता हूँ फ़राज़-ए-जुनूँ से दुनिया को

सय्यद अमीन अशरफ़

लज़्ज़त-ए-दीद ख़ुदा जाने कहाँ ले जाए

सय्यद अमीन अशरफ़

किसी से इश्क़ हो जाने को अफ़्साना नहीं कहते

सय्यद अमीन अशरफ़

कहीं पे दस्त-ए-निगारीं कहीं लब-ए-ल'अलीं

सय्यद अमीन अशरफ़

कहीं भी ताइर-ए-आवारा हो मगर तय है

सय्यद अमीन अशरफ़

जिसे ना-ख़्वाब कहते हैं उसी को ख़्वाब कहते हैं

सय्यद अमीन अशरफ़

इस तरह चश्म-ए-नीम-वा ग़ाफ़िल भी थी बेदार भी

सय्यद अमीन अशरफ़

हवा का तब्सिरा ये साकिनान-ए-शहर पे था

सय्यद अमीन अशरफ़

हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से नहीं जाने वाला

सय्यद अमीन अशरफ़

है ता-हद्द-ए-इम्काँ कोई बस्ती न बयाबाँ

सय्यद अमीन अशरफ़

है इर्तिबात-शिकन दाएरों में बट जाना

सय्यद अमीन अशरफ़

इक ख़ला है जो पुर नहीं होता

सय्यद अमीन अशरफ़

इक चाँद है आवारा-ओ-बेताब ओ फ़लक-ताब

सय्यद अमीन अशरफ़

अजब नहीं कि हो दीवार नुक़्ता-ए-मौहूम

सय्यद अमीन अशरफ़

हम दोज़ख़-ए-एहसास में जलते ही रहेंगे

सय्यद अहमद शमीम

कुछ और कोई अब्र-ए-बहारी को न समझे

सय्यद अाग़ा अली महर

ये क्या तिलिस्म है दुनिया पे बार गुज़री है

सय्यद आबिद अली आबिद

ये हादिसा भी हुआ है कि इश्क़-ए-यार की याद

सय्यद आबिद अली आबिद

यही दिल जिस को शिकायत है गिराँ-जानी की

सय्यद आबिद अली आबिद