Couplets Poetry (page 69)

है जल्वा-फ़रोशी की दुकाँ जो ये अब इसी ने

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

है ईद मय-कदे को चलो देखता है कौन

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

है दौर-ए-फ़लक ज़ोफ़ में पेश-ए-नज़र अपने

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

घर की वीरानी को क्या रोऊँ कि ये पहले सी

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

एक है जब मरजा-ए-इस्लाम-ओ-कुफ़्र

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

चले हो दश्त को 'नाज़िम' अगर मिले मजनूँ

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

चाहूँ कि हाल-ए-वहशत-ए-दिल कुछ रक़म करूँ

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

बोसा-ए-आरिज़ मुझे देते हुए डरता है क्यूँ

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

भला क्या ता'ना दूँ ज़ुहहाद को ज़ुहद-ए-रियाई का

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

बे दिए ले उड़ा कबूतर ख़त

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

बरसों ढूँडा किए हम दैर-ओ-हरम में लेकिन

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

बंद महरम के वो खुलवातें हैं हम से बेशतर

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

अफ़्साना-ए-मजनूँ से नहीं कम मिरा क़िस्सा

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

आ गया ध्यान में मज़मूँ तिरी यकताई का

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

उस से बछड़ा तो यूँ लगा जैसे

सय्यद शकील दस्नवी

'शकील' हिज्र के ज़ीनों पे रुक गईं यादें

सय्यद शकील दस्नवी

रिश्ता रहा अजीब मिरा ज़िंदगी के साथ

सय्यद शकील दस्नवी

फिर कोई चोट उभरी दिल में कसक सी जागी

सय्यद शकील दस्नवी

मौत के खूँ-ख़्वार पंजों में सिसकती है हयात

सय्यद शकील दस्नवी

गर्द-ए-सफ़र के साथ था वाबस्ता इंतिज़ार

सय्यद शकील दस्नवी

अहरमन का रक़्स-ए-वहशत हर गली हर मोड़ पर

सय्यद शकील दस्नवी

वो जो मक़ाम है तेरा मिरी कहानी में

सय्यद काशिफ़ रज़ा

मैं अपने-आप से कम भी हूँ और ज़ियादा भी

सय्यद काशिफ़ रज़ा

कभी कभी मुझे लगता है वो नहीं है वो

सय्यद काशिफ़ रज़ा

इस क़दर ग़ौर से देखा है सरापा उस का

सय्यद काशिफ़ रज़ा

एक दो ज़ख़्म नहीं जिस्म है सारा छलनी

सय्यद हामिद

तर्क-ए-उल्फ़त से मोहब्बत का लिखा मिट न सका

सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी

फिरती है तो फिर जाए बदलती है तो बदले

सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी

कमर बाँधो मुक़द्दर के सहारे बैठने वालो

सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी

हमें तो याद नहीं कोई लम्हा-ए-इशरत

सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी