Couplets Poetry (page 67)

मौज-ए-दरिया से बला की चाहिए कश्ती मुझे

तअशशुक़ लखनवी

मैं बाग़ में हूँ तालिब-ए-दीदार किसी का

तअशशुक़ लखनवी

कभी तो शहीदों की क़ब्रों पे आओ

तअशशुक़ लखनवी

जिस तरफ़ बैठते थे वस्ल में आप

तअशशुक़ लखनवी

जलूँगा मैं कि दिल उस बुत का ग़ैर पर आया

तअशशुक़ लखनवी

हम किस को दिखाते शब-ए-फ़ुर्क़त की उदासी

तअशशुक़ लखनवी

हर तरफ़ हश्र में झंकार है ज़ंजीरों की

तअशशुक़ लखनवी

गया शबाब पर इतना रहा तअल्लुक़-ए-इश्क़

तअशशुक़ लखनवी

देते फिरते थे हसीनों की गली में आवाज़

तअशशुक़ लखनवी

चिराग़-दाग़ मैं दिन से जलाए बैठा हूँ

तअशशुक़ लखनवी

चला घर से वो बहर-ए-हुस्न अल्लाह रे कशिश दिल की

तअशशुक़ लखनवी

बार-ए-ख़ातिर ही अगर है तो इनायत कीजे

तअशशुक़ लखनवी

बहुत मुज़िर दिल-ए-आशिक़ को आह होती है

तअशशुक़ लखनवी

बढ़ते बढ़ते आतिश-ए-रुख़्सार लौ देने लगी

तअशशुक़ लखनवी

अदम से दहर में आना किसे गवारा था

तअशशुक़ लखनवी

आमद आमद है ख़िज़ाँ की जाने वाली है बहार

तअशशुक़ लखनवी

मेहर-ओ-वफ़ा ख़ुलूस-ए-तमन्ना मिलन की आस

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

ख़्वाब और नींदों का ख़त्म हो गया रिश्ता

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

खिड़कियाँ खोल लूँ हर शाम यूँही सोचों की

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

बहुत ग़ुरूर था बिफरे हुए समुंदर को

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

उन के फाटक में यूँ खड़े हैं हम

सय्यद ज़मीर जाफ़री

उन का दरवाज़ा था मुझ से भी सिवा मुश्ताक़-ए-दीद

सय्यद ज़मीर जाफ़री

शौक़ से लख़्त-ए-जिगर नूर-ए-नज़र पैदा करो

सय्यद ज़मीर जाफ़री

मैं बताता हूँ ज़वाल-ए-अहल-ए-यूरोप का प्लान

सय्यद ज़मीर जाफ़री

हम ने कितने धोके में सब जीवन की बर्बादी की

सय्यद ज़मीर जाफ़री

हज़रत-ए-इक़बाल का शाहीं तो हम से उड़ चुका

सय्यद ज़मीर जाफ़री

हँस मगर हँसने से पहले सोच ले

सय्यद ज़मीर जाफ़री

दर्द में लज़्ज़त बहुत अश्कों में रानाई बहुत

सय्यद ज़मीर जाफ़री

चीज़ मिलती है ज़र्फ़ की हद तक

सय्यद ज़मीर जाफ़री

बहन की इल्तिजा माँ की मोहब्बत साथ चलती है

सय्यद ज़मीर जाफ़री