Couplets Poetry (page 71)
या कभी आशिक़ी का खेल न खेल
सय्यद आबिद अली आबिद
वो मुझे मश्वरा-ए-तर्क-ए-वफ़ा देते थे
सय्यद आबिद अली आबिद
वाइज़ो मैं भी तुम्हारी ही तरह मस्जिद में
सय्यद आबिद अली आबिद
उन्हीं को अर्ज़-ए-वफ़ा का था इश्तियाक़ बहुत
सय्यद आबिद अली आबिद
तेरे ख़ुश-पोश फ़क़ीरों से वो मिलते तो सही
सय्यद आबिद अली आबिद
सुबू उठा कि ये नाज़ुक मक़ाम है साक़ी
सय्यद आबिद अली आबिद
शरअ-ओ-आईन की ताज़ीर के बा-वस्फ़ शबाब
सय्यद आबिद अली आबिद
शब-ए-हिज्राँ की दराज़ी से परेशान न था
सय्यद आबिद अली आबिद
साक़िया है तिरी महफ़िल में ख़ुदाओं का हुजूम
सय्यद आबिद अली आबिद
मुझे धोका हुआ कि जादू है
सय्यद आबिद अली आबिद
मेरे जीने का ये उस्लूब पता देता है
सय्यद आबिद अली आबिद
मेरा जीना है सेज काँटों की
सय्यद आबिद अली आबिद
कुछ एहतिराम भी कर ग़म की वज़्अ'-दारी का
सय्यद आबिद अली आबिद
कोई बरसा न सर-ए-किश्त-ए-वफ़ा
सय्यद आबिद अली आबिद
कहते थे तुझी को जान अपनी
सय्यद आबिद अली आबिद
कभी मैं जुरअत-ए-इज़हार-ए-मुद्दआ तो करूँ
सय्यद आबिद अली आबिद
जल्वा-ए-यार से क्या शिकवा-ए-बेजा कीजे
सय्यद आबिद अली आबिद
इश्क़ की तर्ज़-ए-तकल्लुम वही चुप है कि जो थी
सय्यद आबिद अली आबिद
ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-जानाँ का निशाँ है कि जो था
सय्यद आबिद अली आबिद
ग़म के तारीक उफ़ुक़ पर 'आबिद'
सय्यद आबिद अली आबिद
इक दिन उस ने नैन मिला के शर्मा के मुख मोड़ा था
सय्यद आबिद अली आबिद
दर-ए-इख़्लास की दहलीज़ पर ख़म हूँ 'आबिद'
सय्यद आबिद अली आबिद
दम-ए-रुख़्सत वो चुप रहे 'आबिद'
सय्यद आबिद अली आबिद
ऐ इल्तिफ़ात-ए-यार मुझे सोचने तो दे
सय्यद आबिद अली आबिद
आज आया है अपना ध्यान हमें
सय्यद आबिद अली आबिद
बजाए मय दिया पानी का इक गिलास मुझे
सुरूर जहानाबादी
अपनी मिट्टी है कहाँ की क्या ख़बर बाद-ए-सबा
सुरूर जहानाबादी
जिन से मिल कर ज़िंदगी से इश्क़ हो जाए वो लोग
सुरूर बाराबंकवी
हम लोग न उलझे हैं न उलझेंगे किसी से
सुरूर बाराबंकवी
सुख़नवरी से है मक़्सूद मअ'रिफ़त फ़न की
सुलतान रशक