Couplets Poetry (page 181)
मुझ को काफ़ी है बस इक तेरा मुआफ़िक़ होना
रंजूर अज़ीमाबादी
होता है साफ़ रू-ए-किताबी से ये अयाँ
रंजूर अज़ीमाबादी
दिखा कर ज़हर की शीशी कहा 'रंजूर' से उस ने
रंजूर अज़ीमाबादी
देता है मुझ को चर्ख़-ए-कुहन बार बार दाग़
रंजूर अज़ीमाबादी
बुतों में किस बला की है कशिश अल्लाह ही जाने
रंजूर अज़ीमाबादी
अगर चिलमन के बाहर वो बुत-ए-काफ़िर-अदा निकले
रंजूर अज़ीमाबादी
ज़ुल्म की टहनी कभी फलती नहीं
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
वो न आए तो तू ही चल 'रंगीं'
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
था जहाँ मय-ख़ाना बरपा उस जगह मस्जिद बनी
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
ता हश्र रहे ये दाग़ दिल का
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
पा-बोस-ए-यार की हमें हसरत है ऐ नसीम
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
मनअ करते हो अबस यारो आज
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
झूटा कभी न झूटा होवे
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
है ये दुनिया जा-ए-इबरत ख़ाक से इंसान की
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
गर्म इन रोज़ों में कुछ इश्क़ का बाज़ार नहीं
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
बादल आए हैं घिर गुलाल के लाल
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
ज़िंदगी का भी किया भरोसा है
राणा गन्नौरी
तुम्हें ऐ काश कोई राज़ ये समझा गया होता
राणा गन्नौरी
तुम्हारी राह में आँखें बिछाए बैठा हूँ
राणा गन्नौरी
रखो तुम बंद बे-शक अपनी घड़ियाँ
राणा गन्नौरी
रखना हमेशा याद ये मेरा कहा हुआ
राणा गन्नौरी
रहे ख़याल हिक़ारत से देखने वालो
राणा गन्नौरी
मसअले हल करते करते आदमी का ज़ेहन भी
राणा गन्नौरी
ख़ुशी हम से किनारा कर रही है
राणा गन्नौरी
ख़ुद तराशना पत्थर और ख़ुदा बना लेना
राणा गन्नौरी
हम ने दुनिया से सुलूक ऐसा किया है 'राना'
राणा गन्नौरी
हर शख़्स यहाँ साहिब-ए-इदराक नहीं है
राणा गन्नौरी
हर इक की है पसंद अपनी हर इक का है मिज़ाज अपना
राणा गन्नौरी
हमारा दिल तो ग़म में भी ख़ुशी महसूस करता है
राणा गन्नौरी
ऐ ख़ुदा मैं सुन रहा हूँ आहटें उस वक़्त की
राणा गन्नौरी