Couplets Poetry (page 333)
वो मुझे देख कर ख़मोश रहा
इदरीस बाबर
वो बहुत दूर है मगर मिरे पास
इदरीस बाबर
वही न हो कि ये सब लोग साँस लेने लगें
इदरीस बाबर
वही ख़्वाब है वही बाग़ है वही वक़्त है
इदरीस बाबर
टूट सकता है छलक सकता है छिन सकता है
इदरीस बाबर
तू भी हो मैं भी हूँ इक जगह पे और वक़्त भी हो
इदरीस बाबर
तमाम दोस्त अलाव के गिर्द जम्अ थे और
इदरीस बाबर
फूल है जो किताब में अस्ल है कि ख़्वाब है
इदरीस बाबर
पर नहीं होते ख़यालों के तो फिर
इदरीस बाबर
मिरे सवाल वही टूट-फूट की ज़द में
इदरीस बाबर
मौत उकता चुकी रीहरसल में
इदरीस बाबर
मौत की पहली अलामत साहिब
इदरीस बाबर
मर गया ख़ास तौर पर मैं भी
इदरीस बाबर
मैं जिन्हें याद हूँ अब तक यही कहते होंगे
इदरीस बाबर
मैं जानता हूँ ये मुमकिन नहीं मगर ऐ दोस्त
इदरीस बाबर
कोई भी दिल में ज़रा जम के ख़ाक उड़ाता तो
इदरीस बाबर
किधर गया वो कूज़ा-गर ख़बर नहीं
इदरीस बाबर
ख़ुद-कुशी भी नहीं मिरे बस में
इदरीस बाबर
कहानियों ने मिरी आदतें बिगाड़ी थीं
इदरीस बाबर
काम की बात पूछते क्या हो
इदरीस बाबर
इस क़दर मत उदास हो जैसे
इदरीस बाबर
इस अँधेरे में जब कोई भी न था
इदरीस बाबर
हाथ दुनिया का भी है दिल की ख़राबी में बहुत
इदरीस बाबर
हाँ ऐ गुबार-ए-आश्ना मैं भी था हम-सफ़र तिरा
इदरीस बाबर
इक ख़ौफ़-ज़दा सा शख़्स घर तक
इदरीस बाबर
इक दिया दिल की रौशनी का सफ़ीर
इदरीस बाबर
दिल की इक एक ख़राबी का सबब जानते हैं
इदरीस बाबर
धूल उड़ती है तो याद आता है कुछ
इदरीस बाबर
दर्द का दिल का शाम का बज़्म का मय का जाम का
इदरीस बाबर
आज तो जैसे दिन के साथ दिल भी ग़ुरूब हो गया
इदरीस बाबर