Couplets Poetry (page 88)
बड़े वसूक़ से दुनिया फ़रेब देती रही
शाैकत वास्ती
इन ही का नाम मोहब्बत इन ही का नाम जुनूँ
शौकत थानवी
हमेशा ग़ैर की इज़्ज़त तिरी महफ़िल में होती है
शौकत थानवी
धोका था निगाहों का मगर ख़ूब था धोका
शौकत थानवी
ज़िंदगी से कोई मानूस तो हो ले पहले
शौकत परदेसी
ये कैसी बे-क़रारी सुनने वालों के दिलों में है
शौकत परदेसी
वो आँखें जो अब अजनबी हो गई हैं
शौकत परदेसी
उस की हँसी तुम क्या समझो
शौकत परदेसी
उन की निगाह-ए-नाज़ की गर्दिश के साथ साथ
शौकत परदेसी
तुम ही अब वो नहीं रहे वर्ना
शौकत परदेसी
'शौकत' वो आज आप को पहचान तो गए
शौकत परदेसी
शरीक-ए-दर्द नहीं जब कोई तो ऐ 'शौकत'
शौकत परदेसी
रात इक नादार का घर जल गया था और बस
शौकत परदेसी
क़रीब से उसे देखो तो वो भी तन्हा है
शौकत परदेसी
फूँक कर सारा चमन जब वो शरीक-ए-ग़म हुए
शौकत परदेसी
निगाह को भी मयस्सर है दिल की गहराई
शौकत परदेसी
ना-शनासान-ए-मुहब्बत का गिला क्या कि यहाँ
शौकत परदेसी
मौज-ए-तूफ़ाँ से निकल कर भी सलामत न रहे
शौकत परदेसी
क्या बढ़ेगा वो तसव्वुर की हदों से आगे
शौकत परदेसी
कुछ तो फ़ितरत से मिली दानाई
शौकत परदेसी
किसी की बाज़ी कैसी घात
शौकत परदेसी
ख़ुद वो करते हैं जिसे अहद-ए-वफ़ा से ताबीर
शौकत परदेसी
जी में आता है कि 'शौकत' किसी चिंगारी को
शौकत परदेसी
जब मस्लहत-ए-वक़्त से गर्दन को झुका कर
शौकत परदेसी
इस फ़ैसले पे लुट गई दुनिया-ए-ए'तिबार
शौकत परदेसी
हुस्न-ए-इख़्लास ही नहीं वर्ना
शौकत परदेसी
हदूद-ए-जिस्म से आगे बढ़े तो ये देखा
शौकत परदेसी
होश वाले तो उलझते ही रहे
शौकत परदेसी
हवाएँ रोक न पाईं भँवर डुबो न सके
शौकत परदेसी
हँसते हँसते बहे हैं आँसू भी
शौकत परदेसी