Couplets Poetry (page 154)
काग़ज़ पे उगल रहा है नफ़रत
सैफ़ ज़ुल्फ़ी
एहसास में शदीद तलातुम के बावजूद
सैफ़ ज़ुल्फ़ी
चिंगारियाँ न डाल मिरे दिल के घाव में
सैफ़ ज़ुल्फ़ी
यही आदत तो है 'सादी' सुकून-ए-क़ल्ब का बाइस
सईद इक़बाल सादी
नहीं हैं बोलने वाले जो चार सू अपने
सईद इक़बाल सादी
ये क्यूँकर मान लें उल्फ़त हमें करनी नहीं आती
साहिर सियालकोटी
सँभल कर पाँव रखना वादी-ए-इश्क़-ओ-मोहब्बत में
साहिर सियालकोटी
ख़ुलूस-ए-शौक़ में 'साहिर' बड़ी तासीर होती है
साहिर सियालकोटी
होती है दूसरों को हमेशा ये नागवार
साहिर सियालकोटी
गुलों को तोड़ते हैं सूँघते हैं फेंक देते हैं
साहिर सियालकोटी
बढ़ी है ख़ाना-ए-दिल में कुछ और तारीकी
साहिर सियालकोटी
ऐ शम्अ' अहल-ए-बज़्म तो बैठे ही रह गए
साहिर सियालकोटी
ज़मीं ने ख़ून उगला आसमाँ ने आग बरसाई
साहिर लुधियानवी
यूँही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना
साहिर लुधियानवी
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
साहिर लुधियानवी
वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है
साहिर लुधियानवी
वफ़ा-शिआर कई हैं कोई हसीं भी तो हो
साहिर लुधियानवी
उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा
साहिर लुधियानवी
उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहाँ
साहिर लुधियानवी
तुम्हारे अहद-ए-वफ़ा को मैं अहद क्या समझूँ
साहिर लुधियानवी
तुम मेरे लिए अब कोई इल्ज़ाम न ढूँडो
साहिर लुधियानवी
तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
साहिर लुधियानवी
तुझ को ख़बर नहीं मगर इक सादा-लौह को
साहिर लुधियानवी
तुझे भुला देंगे अपने दिल से ये फ़ैसला तो किया है लेकिन
साहिर लुधियानवी
तू मुझे छोड़ के ठुकरा के भी जा सकती है
साहिर लुधियानवी
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
साहिर लुधियानवी
तरब-ज़ारों पे क्या गुज़री सनम-ख़ानों पे क्या गुज़री
साहिर लुधियानवी
तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम
साहिर लुधियानवी
संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है
साहिर लुधियानवी
रंगों में तेरा अक्स ढला तू न ढल सकी
साहिर लुधियानवी