Couplets Poetry (page 153)
'सैफ़' पी कर भी तिश्नगी न गई
सैफ़ुद्दीन सैफ़
'सैफ़' अंदाज़-ए-बयाँ रंग बदल देता है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
रात गुज़रे न दर्द-ए-दिल ठहरे
सैफ़ुद्दीन सैफ़
क़रीब-ए-नज़'अ भी क्यूँ चैन ले सके कोई
सैफ़ुद्दीन सैफ़
फूल इस ख़ाक-दाँ के हम भी हैं
सैफ़ुद्दीन सैफ़
पास आए तो और हो गए दूर
सैफ़ुद्दीन सैफ़
मिरी दास्तान-ए-हसरत वो सुना सुना के रोए
सैफ़ुद्दीन सैफ़
मेरा होना भी कोई होना है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
क्यूँ उजड़ जाती है दिल की महफ़िल
सैफ़ुद्दीन सैफ़
क्या क़यामत है हिज्र के दिन भी
सैफ़ुद्दीन सैफ़
कोई ऐसा अहल-ए-दिल हो कि फ़साना-ए-मोहब्बत
सैफ़ुद्दीन सैफ़
कितने अंजान हैं क्या सादगी से पूछते हैं
सैफ़ुद्दीन सैफ़
कैसे जीते हैं ये किस तरह जिए जाते हैं
सैफ़ुद्दीन सैफ़
कभी जिगर पे कभी दिल पे चोट पड़ती है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
जिस दिन से भुला दिया है तू ने
सैफ़ुद्दीन सैफ़
जी नहीं आप से क्या मुझ को शिकायत होगी
सैफ़ुद्दीन सैफ़
हुस्न जल्वा दिखा गया अपना
सैफ़ुद्दीन सैफ़
हमें ख़बर है वो मेहमान एक रात का है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
ग़म-गुसारो बहुत उदास हूँ मैं
सैफ़ुद्दीन सैफ़
दुश्मन गए तो कशमकश-ए-दोस्ती गई
सैफ़ुद्दीन सैफ़
दिल-ए-वीराँ को देखते क्या हो
सैफ़ुद्दीन सैफ़
दिल-ए-नादाँ तिरी हालत क्या है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
दिल ने पाया क़रार पहलू में
सैफ़ुद्दीन सैफ़
चलो मय-कदे में बसेरा ही कर लो
सैफ़ुद्दीन सैफ़
बोले वो कुछ ऐसी बे-रुख़ी से
सैफ़ुद्दीन सैफ़
अपनी वुसअत में खो चुका हूँ मैं
सैफ़ुद्दीन सैफ़
ऐसे लम्हे भी गुज़ारे हैं तिरी फ़ुर्क़त में
सैफ़ुद्दीन सैफ़
आप ठहरे हैं तो ठहरा है निज़ाम-ए-आलम
सैफ़ुद्दीन सैफ़
आज की रात वो आए हैं बड़ी देर के ब'अद
सैफ़ुद्दीन सैफ़
तूफ़ान आए शहर में या कोई ज़लज़ला
सैफ़ी सरौंजी