Couplets Poetry (page 155)

फिर न कीजे मिरी गुस्ताख़-निगाही का गिला

साहिर लुधियानवी

फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में

साहिर लुधियानवी

नालाँ हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों

साहिर लुधियानवी

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने

साहिर लुधियानवी

मिरी नदीम मोहब्बत की रिफ़अ'तों से न गिर

साहिर लुधियानवी

मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में भी तू

साहिर लुधियानवी

मायूसी-ए-मआल-ए-मोहब्बत न पूछिए

साहिर लुधियानवी

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके

साहिर लुधियानवी

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया

साहिर लुधियानवी

मैं जिसे प्यार का अंदाज़ समझ बैठा हूँ

साहिर लुधियानवी

लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद

साहिर लुधियानवी

ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है

साहिर लुधियानवी

कोई तो ऐसा घर होता जहाँ से प्यार मिल जाता

साहिर लुधियानवी

किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे

साहिर लुधियानवी

कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त

साहिर लुधियानवी

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया

साहिर लुधियानवी

जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया

साहिर लुधियानवी

जज़्बात भी हिन्दू होते हैं चाहत भी मुसलमाँ होती है

साहिर लुधियानवी

जब तुम से मोहब्बत की हम ने तब जा के कहीं ये राज़ खुला

साहिर लुधियानवी

जान-ए-तन्हा पे गुज़र जाएँ हज़ारों सदमे

साहिर लुधियानवी

इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ

साहिर लुधियानवी

इस रेंगती हयात का कब तक उठाएँ बार

साहिर लुधियानवी

हम से अगर है तर्क-ए-तअल्लुक़ तो क्या हुआ

साहिर लुधियानवी

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को

साहिर लुधियानवी

हम जुर्म-ए-मोहब्बत की सज़ा पाएँगे तन्हा

साहिर लुधियानवी

हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत

साहिर लुधियानवी

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें

साहिर लुधियानवी

हर-चंद मिरी क़ुव्वत-ए-गुफ़्तार है महबूस

साहिर लुधियानवी

हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाया

साहिर लुधियानवी

हमीं से रंग-ए-गुलिस्ताँ हमीं से रंग-ए-बहार

साहिर लुधियानवी