Couplets Poetry (page 156)
ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
साहिर लुधियानवी
गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से
साहिर लुधियानवी
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
साहिर लुधियानवी
दुनिया ने तजरबात ओ हवादिस की शक्ल में
साहिर लुधियानवी
दुल्हन बनी हुई हैं राहें
साहिर लुधियानवी
दिल के मुआमले में नतीजे की फ़िक्र क्या
साहिर लुधियानवी
देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से
साहिर लुधियानवी
चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ
साहिर लुधियानवी
बे पिए ही शराब से नफ़रत
साहिर लुधियानवी
बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो
साहिर लुधियानवी
बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था
साहिर लुधियानवी
औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
साहिर लुधियानवी
अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
साहिर लुधियानवी
अँधेरी शब में भी तामीर-ए-आशियाँ न रुके
साहिर लुधियानवी
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में
साहिर लुधियानवी
अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
साहिर लुधियानवी
अब आएँ या न आएँ इधर पूछते चलो
साहिर लुधियानवी
आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें
साहिर लुधियानवी
वो और होंगे पी के जो सरशार हो गए
साहिर होशियारपुरी
तुम न तौबा करो जफ़ाओं से
साहिर होशियारपुरी
फिर किसी बेवफ़ा की याद आई
साहिर होशियारपुरी
कौन कहता है मोहब्बत की ज़बाँ होती है
साहिर होशियारपुरी
जब बिगड़ते हैं बात बात पे वो
साहिर होशियारपुरी
हम क़रीब आ कर और दूर हुए
साहिर होशियारपुरी
हम को अग़्यार का गिला क्या है
साहिर होशियारपुरी
दिल वो सहरा है कि जिस में रात दिन
साहिर होशियारपुरी
अपनी अपनी ज़ात में गुम हैं अहल-ए-दिल भी अहल-ए-नज़र भी
साहिर होशियारपुरी
अहल-ए-कशती ने ख़ुद-कुशी की थी
साहिर होशियारपुरी
अब तो एहसास-ए-तमन्ना भी नहीं
साहिर होशियारपुरी
आख़िर तड़प तड़प के ये ख़ामोश हो गया
साहिर होशियारपुरी