Couplets Poetry (page 157)
यूँ तो हर दीन में है साहब-ए-ईमाँ होना
साहिर देहल्वी
वा होते हैं मस्ती में ख़राबात के असरार
साहिर देहल्वी
था अनल-हक़ लब-ए-मंसूर पे क्या आप से आप
साहिर देहल्वी
शेर क्या है आह है या वाह है
साहिर देहल्वी
क़ुल्ज़ुम-ए-फ़िक्र में है कश्ती-ए-ईमाँ सालिम
साहिर देहल्वी
क़दम है ऐन हुदूस और हुदूस ऐन क़दम
साहिर देहल्वी
पाबंदी-ए-अहकाम-ए-शरीअत है वहाँ फ़र्ज़
साहिर देहल्वी
नक़्श-ए-क़दम हैं राह में फ़रहाद-ओ-क़ैस के
साहिर देहल्वी
मिल-मिला के दोनों ने दिल को कर दिया बरबाद
साहिर देहल्वी
मैं दीवाना हूँ और दैर-ओ-हरम से मुझ को वहशत है
साहिर देहल्वी
क्या शौक़ का आलम था कि हाथों से उड़ा ख़त
साहिर देहल्वी
किताब-ए-दर्स-ए-मजनूँ मुसहफ़-रुख़्सार-ए-लैला है
साहिर देहल्वी
कौनैन-ए-ऐन-ए-इल्म में है जल्वा-गाह-ए-हुस्न
साहिर देहल्वी
जो ला-मज़हब हो उस को मिल्लत-ओ-मशरब से क्या मतलब
साहिर देहल्वी
हम गदा-ए-दर-ए-मय-ख़ाना हैं ऐ पीर-ए-मुग़ाँ
साहिर देहल्वी
है सनम-ख़ाना मिरा पैमान-ए-इश्क़
साहिर देहल्वी
ग़म-ए-मौजूद ग़लत और ग़म-ए-फ़र्दा बातिल
साहिर देहल्वी
बे-निशाँ साहिर निशाँ में आ के शायद बन गया
साहिर देहल्वी
अज़ल से हम-नफ़सी है जो जान-ए-जाँ से हमें
साहिर देहल्वी
अयाँ 'अलीम' से है जिस्म-ओ-जान का इल्हाक़
साहिर देहल्वी
ऐ परी-रू तिरे दीवाने का ईमाँ क्या है
साहिर देहल्वी
अहद-ए-मीसाक़ का लाज़िम है अदब ऐ वाइ'ज़
साहिर देहल्वी
आते हुए इस तन में न जाते हुए तन से
साहिर देहल्वी
वफ़ा तो कैसी जफ़ा भी नहीं है अब हम पर
साहिर भोपाली
तलातुम का एहसान क्यूँ हम उठाएँ
साहिर भोपाली
बाँध के सफ़ हों सब खड़े तेग़ के साथ सर झुके
साहिर भोपाली
उन से ऐ दोस्त मिरा यूँ कोई रिश्ता तो न था
साहिल अहमद
शेर गुफा से निकलेगा
साहिल अहमद
रो पड़ीं आँखें बहुत 'साहिल' मिरी
साहिल अहमद
मकड़ियों ने जब कहीं जाला तना
साहिल अहमद