Couplets Poetry (page 233)
कुछ हम को इम्तियाज़ नहीं साफ़ ओ दुर्द का
नज़ीर अकबराबादी
कूचे में उस के बैठना हुस्न को उस के देखना
नज़ीर अकबराबादी
कोई तो पगड़ी बदलता है औरों से लेकिन
नज़ीर अकबराबादी
कितना तनिक सफ़ा है कि पा-ए-निगाह का
नज़ीर अकबराबादी
किस को कहिए नेक और ठहराइए किस को बुरा
नज़ीर अकबराबादी
ख़ुदा के वास्ते गुल को न मेरे हाथ से लो
नज़ीर अकबराबादी
ख़फ़ा देखा है उस को ख़्वाब में दिल सख़्त मुज़्तर है
नज़ीर अकबराबादी
कमाल-ए-इश्क़ भी ख़ाली नहीं तमन्ना से
नज़ीर अकबराबादी
कल शब-ए-वस्ल में क्या जल्द बजी थीं घड़ियाँ
नज़ीर अकबराबादी
कल 'नज़ीर' उस ने जो पूछा ब-ज़बान-ए-पंजाब
नज़ीर अकबराबादी
कल बोसा-ए-पा हम ने लिया था सो न आया
नज़ीर अकबराबादी
कहीं बैठने दे दिल अब मुझे जो हवास टुक मैं बजा करूँ
नज़ीर अकबराबादी
जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
नज़ीर अकबराबादी
जो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी है
नज़ीर अकबराबादी
जो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी है
नज़ीर अकबराबादी
जितने हैं कुश्तगान-ए-इश्क़ उन के अज़ल से हैं मिले
नज़ीर अकबराबादी
जिस्म क्या रूह की है जौलाँ-गाह
नज़ीर अकबराबादी
जिसे मोल लेना हो ले ले ख़ुशी से
नज़ीर अकबराबादी
जिस काम को जहाँ में तू आया था ऐ 'नज़ीर'
नज़ीर अकबराबादी
जा पड़े चुप हो के जब शहर-ए-ख़मोशाँ में 'नज़ीर'
नज़ीर अकबराबादी
इश्क़ का दूर करे दिल से जो धड़का तावीज़
नज़ीर अकबराबादी
हुस्न के नाज़ उठाने के सिवा
नज़ीर अकबराबादी
हम वो दरख़्त हैं कि जिसे दम-ब-दम अजल
नज़ीर अकबराबादी
हम हाल तो कह सकते हैं अपना प कहें क्या
नज़ीर अकबराबादी
हस्तियाँ नीस्तियाँ याँ भी हैं ऐसी जैसे
नज़ीर अकबराबादी
हर इक मकाँ में गुज़रगाह-ए-ख़्वाब है लेकिन
नज़ीर अकबराबादी
है दसहरे में भी यूँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
नज़ीर अकबराबादी
गो सफ़ेदी मू की यूँ रौशन है जूँ आब-ए-हयात
नज़ीर अकबराबादी
ग़श खा के गिरा पहले ही शोले की झलक से
नज़ीर अकबराबादी
ग़रज़ न सर की ख़बर थी न पा का होश 'नज़ीर'
नज़ीर अकबराबादी