Couplets Poetry (page 396)

उजले मैले पेश हुए

गौहर होशियारपुरी

फूलों में वही तो फूल ठहरा

गौहर होशियारपुरी

नाव न डूबी दरिया में

गौहर होशियारपुरी

लोग किनारे आन लगे

गौहर होशियारपुरी

लहजा तो बदल चुभती हुई बात से पहले

गौहर होशियारपुरी

कहाँ वो ज़ब्त के दावे कहाँ ये हम 'गौहर'

गौहर होशियारपुरी

ये महल ये माल ओ दौलत सब यहीं रह जाएँगे

गणेश बिहारी तर्ज़

सुब्ह हैं सज्दे में हम तो शाम साक़ी के हुज़ूर

गणेश बिहारी तर्ज़

रात की रात बहुत देख ली दुनिया तेरी

गणेश बिहारी तर्ज़

पत्थरों के देस में शीशे का है अपना वक़ार

गणेश बिहारी तर्ज़

दिल-ए-ग़म-ज़दा पे गुज़र गया है वो हादसा कि मिरे लिए

गणेश बिहारी तर्ज़

'दाग़' के शेर जवानी में भले लगते हैं

गणेश बिहारी तर्ज़

बज़्म-ए-याराँ है ये साक़ी मय नहीं तो ग़म न कर

गणेश बिहारी तर्ज़

अर्ज़-ए-दकन में जान तो दिल्ली में दिल बनी

गणेश बिहारी तर्ज़

ऐ गर्दिशो तुम्हें ज़रा ताख़ीर हो गई

गणेश बिहारी तर्ज़

अहल-ए-दिल के वास्ते पैग़ाम हो कर रह गई

गणेश बिहारी तर्ज़

अब मैं हुदूद-ए-होश-ओ-ख़िरद से गुज़र गया

गणेश बिहारी तर्ज़

ज़िद में दुनिया की बहर-हाल मिला करते थे

फ़ुज़ैल जाफ़री

ज़हर मीठा हो तो पीने में मज़ा आता है

फ़ुज़ैल जाफ़री

ये सच है हम को भी खोने पड़े कुछ ख़्वाब कुछ रिश्ते

फ़ुज़ैल जाफ़री

तिरी बदन में मेरे ख़्वाब मुस्कुराते हैं

फ़ुज़ैल जाफ़री

तअल्लुक़ात का तन्क़ीद से है याराना

फ़ुज़ैल जाफ़री

मिज़ाज अलग सही हम दोनों क्यूँ अलग हों कि हैं

फ़ुज़ैल जाफ़री

मंज़िलें सम्तें बदलती जा रही हैं रोज़ ओ शब

फ़ुज़ैल जाफ़री

मैं और मिरी ज़ात अगर एक ही शय हैं

फ़ुज़ैल जाफ़री

कोई मंज़िल आख़िरी मंज़िल नहीं होती 'फ़ुज़ैल'

फ़ुज़ैल जाफ़री

किस दर्द से रौशन है सियह-ख़ाना-ए-हस्ती

फ़ुज़ैल जाफ़री

जो भर भी जाएँ दिल के ज़ख़्म दिल वैसा नहीं रहता

फ़ुज़ैल जाफ़री

हर आदमी में थे दो चार आदमी पिन्हाँ

फ़ुज़ैल जाफ़री

घर से बाहर नहीं निकला जाता

फ़ुज़ैल जाफ़री