Couplets Poetry (page 436)
न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
दाग़ देहलवी
मुझ को मज़ा है छेड़ का दिल मानता नहीं
दाग़ देहलवी
मुझे याद करने से ये मुद्दआ था
दाग़ देहलवी
मुझ गुनहगार को जो बख़्श दिया
दाग़ देहलवी
मुअज़्ज़िन ने शब-ए-वस्ल अज़ाँ पिछले पहर
दाग़ देहलवी
'मीर' का रंग बरतना नहीं आसाँ ऐ 'दाग़'
दाग़ देहलवी
मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है
दाग़ देहलवी
मिरी आह का तुम असर देख लेना
दाग़ देहलवी
मेरे क़ाबू में न पहरों दिल-ए-नाशाद आया
दाग़ देहलवी
मर्ग-ए-दुश्मन का ज़ियादा तुम से है मुझ को मलाल
दाग़ देहलवी
मैं भी हैरान हूँ ऐ 'दाग़' कि ये बात है क्या
दाग़ देहलवी
लुत्फ़-ए-मय तुझ से क्या कहूँ ज़ाहिद
दाग़ देहलवी
लिपट जाते हैं वो बिजली के डर से
दाग़ देहलवी
लीजिए सुनिए अब अफ़्साना-ए-फ़ुर्क़त मुझ से
दाग़ देहलवी
ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा
दाग़ देहलवी
लज़्ज़त-ए-इश्क़ इलाही मिट जाए
दाग़ देहलवी
लाख देने का एक देना था
दाग़ देहलवी
क्यूँ वस्ल की शब हाथ लगाने नहीं देते
दाग़ देहलवी
क्या पूछते हो कौन है ये किस की है शोहरत
दाग़ देहलवी
क्या लुत्फ़-ए-दोस्ती कि नहीं लुत्फ़-ए-दुश्मनी
दाग़ देहलवी
क्या क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में
दाग़ देहलवी
क्या क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में
दाग़ देहलवी
क्या इज़्तिराब-ए-शौक़ ने मुझ को ख़जिल किया
दाग़ देहलवी
कोई नाम-ओ-निशाँ पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना
दाग़ देहलवी
कोई छींटा पड़े तो 'दाग़' कलकत्ते चले जाएँ
दाग़ देहलवी
की तर्क-ए-मय तो माइल-ए-पिंदार हो गया
दाग़ देहलवी
ख़ुदा की क़सम उस ने खाई जो आज
दाग़ देहलवी
ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं
दाग़ देहलवी
ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया
दाग़ देहलवी
ख़बर सुन कर मिरे मरने की वो बोले रक़ीबों से
दाग़ देहलवी